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Shital Devi Archery
Photo Source - Twitter

Sheetal Devi Archery: हाल ही में जम्मू कश्मीर की शीतल देवी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता होने पर अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। खेल मंत्रालय ने अर्जुन अवार्ड खिलाड़ियों की सूची जारी की, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 जनवरी 2024 को भवन में खिलाड़ियों को ट्रॉफी पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अर्जुन अवार्ड मिलने की खुशी जम्मू कश्मीर में भी फैली हुई है। जम्मू कश्मीर की बेटी शीतल देवी का कहना है कि मैंने जिंदगी के हर कठिनाइयों को एक वरदान समझ कर अपनाया है और मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका कहना है कि अपनी सफलता का श्रेय वह कड़ी मेहनत के साथ कुलदीप विद्वान, अभिलाषा चौधरी को देती हैं।

कठिन मेहनत, जिद और जुनून होना बहुत जरूरी-

शीतल का कहना है की सफलता के पहाड़ पर चढ़ने के लिए लोगों ने उन्हें पूरा हौसला दिया है और उनका कहना है कि उन्हें बचपन में स्कूल जाना और खेलना अच्छा लगता था। वह शिक्षक बनना चाहती थी, लेकिन बाद में यह सपना तीरंदाजी में बदल गया। शुरुआत में वह धनुष भी सही से नहीं पकड़ पाती थी। लेकिन उनके कोच ने उन्हें हिम्मत दिलाई और कहा की वह कर पाएंगी। शीतल देवी ने युवाओं को यह संदेश दिया कि जीवन में कुछ पाने के लिए कठिन मेहनत, जिद और जुनून होना बहुत जरूरी है। इन्हें देखकर हमें पता चलता है कि अगर हौसला हो तो बिना हाथों के भी तीर निशाने पर लगाया जा सकता है। यह बात जम्मू कश्मीर की बेटी शीतल देवी ने सच कर दिखाई।

(Sheetal Devi Archery) पैरा एशियाई गेम्स में स्वर्ण पदक-

शीतल ने बिना हाथों के पैरा एशियाई गेम्स में स्वर्ण पदक जीत कर देश का परचम लहराया है। विश्व में नंबर वन पैरा तीरंदाज की इस उपलब्धि पर मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में जब अर्जुन पुरस्कार के लिए शीतल देवी का नाम लिया तो वह पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी जमकर साझा किया जा रहा है। देश भर में लोगों ने दिल खोलकर गोल्डन गर्ल को इस उपलब्धि के लिए बधाइयां दी। हर कोई उन्हें अवार्ड लेते देख कर खुश नजर आ रहा है। उन्हें देखकर सिर्फ यही लगता है कि शारीरिक क्षमता ना होने के बावजूद अगर आपका मनोबल ऊंचा रहे तो मंजिल को पाया जा सकता है।

शानदार प्रदर्शन-

शीतल देवी ने बीते साल में आयोजित चौथे पैरा एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता था। वहीं पर 2023 में उन्होंने चेक गणराज्य के पेशन में आयोजित हुए विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। एशियन गेम्स में धमाल मचाने के बाद जब शीतल वापस भारत आईं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जज्बे को सलाम किया। एशियन गेम्स में तीन मेडल जीतने के बाद अब वह इसी साल पेरिस पैरालंपिक खेलों में अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराते हुए अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं। शीतल देवी के किश्तवाड़ में के पैतृक गांव में खुशी का माहौल है और ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव की बेटी को राष्ट्रपति से पुरस्कार मिला तो वह गर्व से झूम उठे।

पूरे देश को गर्व-

एक छोटे से गांव से निकलकर बिना हाथों के शीतल ने देश का नाम दुनिया में ऊंचा कर दिया है। अब इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति से अर्जुन पदक मिला है। इसके अलावा इस खुशी को जाहिर करते हुए एसडीएम के शौकत हयात ने अधिकारियों के साथ शीतल देवी के परिजनों को हार पहनाकर उनको मिठाइयां खिला कर सम्मानित किया। एसडीएम शौकत हयात का कहना है कि शीतल के साथ उनके परिजन भी इस समय दिल्ली में मौजूद हैं। ऐसे में उनके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खुशी साझा की जा सकती है। शीतल देवी को सिर्फ उनके गांव के लोगों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को गर्व है। शीतल ने अपनी हिम्मत और कड़ी मेहनत के दम पर दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया है।

भारत ने 100 पदक जीते-

इस सब के अलावा भारत ने पैरा एशियाई पैरा खेलों में पद का शतक लगा लिया है। शनिवार के दिन शुरुआत के साथ भारत की झोली में स्वर्ण पदक आया और यह पदक दिलीप बहादुर गणित ने यह स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 49.48 सेकंड के शानदार समय में स्वर्ण पदक हासिल किया। पहली बार भारत ने 100 पदक जीते हैं, जिससे कि उनका यह अब तक का सबसे सफल खेल अभियान बन चुका है। अभी तक भारत ने 26 स्वर्ण पदक, 29 रजत पदक और 45 का अध्याय परिषद जीते थे। पहले एथलीट ने देश के लिए पिछली सबसे ज्यादा पदक हासिल का रिकॉर्ड जकार्ता में 2018 में बनाया था। उस समय भारत ने 72 पद जीते थे। जिसमें 15 स्वर्ण, 24 रजत और 33 कांस्य पदक शामिल थे। शीतल देवी के बारे में बात की जाए तो उनका जन्म किश्तवाड़ जिले के एक गांव में हुआ था।

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कौन हैं Sheetal Devi Archery

जम्मू कश्मीर की शीतल देवी के पिता एक मामूली किसान हैं और उनकी मां घर संभालने का काम करती हैं यानी वह एक हाउस वाइफ हैं। जन्म से ही शीतल के दोनों हाथ नहीं हैं। कई सारी चुनौतियो के साथ ही वह शारीरिक रूप से भी काफी कमजोर हैं। लेकिन उन्होंने अपने पैरों से पूरी दुनिया को अपनी तीरंदाजी का कमाल दिखाया। पूरी दुनिया में अपना नाम बनाया, अर्जुन अवार्ड मिलने से शीतल देवी बहुत खुश नजर आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक मीडिया से बात करते हुए उन्हेंने कहा है कि वैष्णो देवी की कृपा उन पर बनी हुई है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू से मिला आशीर्वाद उनके लिए अमूल्य है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शीतल देवी बचपन से एक बीमारी से ग्रसित हैं। इस बीमारी के वजह से उनका शरीर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया। जिस वजह से उन्हें जीवन में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

वह कहते हैं ना जिंदगी में कठिनाईयों का आना जाना तो आम बात है लेकिन जो उन कठिनाईयों के पार कर आगे निकल जाता है वहीं दुनिया में अपना नाम रोशन कर जाता है।

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