Blinkit Illegal Knives: दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की है। आरोप है, कि यह प्लेटफॉर्म गैरकानूनी चाकू खुलेआम बेच रहा था, वो भी सिर्फ कुछ मिनटों की डिलीवरी के वादे के साथ। पश्चिमी जिला पुलिस ने 14 फरवरी 2026 को ख्याला थाने में शस्त्र अधिनियम की धारा 25, 54 और 59 के तहत यह केस दर्ज किया। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंधित हथियारों की बिक्री पर नज़र रखने के दौरान सामने आई।
पुलिस ने खुद किया टेस्ट ऑर्डर-
टाइम्स नाउ के मुताबिक, मामला तब सामने आया, जब दिल्ली पुलिस रूटीन मॉनिटरिंग के दौरान ब्लिंकिट ऐप पर चाकुओं की लिस्टिंग देख हैरान रह गई। यह पक्का करने के लिए, कि वाकई नियमों का उल्लंघन हो रहा है, पुलिस ने खुद एक स्टैनली नाइफ का टेस्ट ऑर्डर प्लेस किया। कुछ ही देर में वो चाकू डिलीवर हो गया। जांच में पता चला, कि यह एक गराड़ीदार चाकू था यानी ऐसा चाकू, जिसे हाथ से खोला और बंद किया जा सकता है। इसकी कीमत 699 रुपये थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया, कि इस तरह के फोल्डिंग पॉकेट नाइफ अक्सर हत्या जैसे गंभीर अपराधों में इस्तेमाल होते हैं।
साइज़ में निकली गड़बड़-
जब पुलिस ने उस चाकू को ध्यान से नापा तो पाया, कि उसके ब्लेड की लंबाई 8 सेंटीमीटर और चौड़ाई 2.5 सेंटीमीटर थी। सरकारी नियमों के मुताबिक, ब्लेड की अधिकतम लंबाई 7.62 सेंटीमीटर और चौड़ाई 1.72 सेंटीमीटर से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। यानी ब्लिंकिट जो चाकू बेच रहा था, वो हर पैमाने पर कानूनी सीमा से बाहर था। इसके बाद पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
दिल्ली में छापेमारी, 16 चाकू बरामद-
एफआईआर दर्ज होने के बाद 15 फरवरी को पुलिस टीमों ने दिल्ली भर में ब्लिंकिट के कई स्टोर्स पर छापेमारी की। इस दौरान अलग-अलग लोकेशन से कुल 16 अवैध चाकू बरामद किए गए। इससे साफ हो गया, कि यह मामला किसी एक आउटलेट तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
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गुरुग्राम वेयरहाउस में मिले 32 और चाकू-
जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फर्रुखनगर में ब्लिंकिट के वेयरहाउस तक पहुंची। 16 फरवरी को वहाँ तलाशी ली गई और 32 और अवैध चाकू मिले। इस तरह इस पूरे मामले में अब तक बरामद चाकुओं की कुल संख्या 50 हो गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है, कि ये चाकू कहां से आते थे और इनका नेटवर्क कितना बड़ा है। यह मामला यह सोचने पर मजबूर करता है, कि आखिर हम जो चीज़ें मिनटों में ऑर्डर करते हैं, वो कितनी सुरक्षित हैं?
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