Control on Light: आज की दुनिया में इंटरनेट और वायरलेस कम्युनिकेशन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा ,है कि रोशनी की किरणें ही आपका डेटा ट्रांसफर कर सकती हैं? चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जो सुनने में तो किसी साइंस फिक्शन मूवी की कहानी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह से हकीकत है। तियानजिन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने रोशनी को कंट्रोल करने का एक ऐसा तरीका ढूंढा है, जो वायरलेस कम्युनिकेशन की दुनिया में तहलका मचा सकता है।
डोनट के आकार की रोशनी का कमाल-
वैज्ञानिकों ने रोशनी के दो खास पैटर्न जेनरेट किए हैं, जो देखने में छोटे चमकते हुए डोनट्स जैसे लगते हैं। फिजिक्स की भाषा में इन्हें स्काइर्मियन्स कहा जाता है। आम रोशनी से अलग, ये स्काइर्मियन्स स्टेबल होते हैं। मतलब, चाहे कोई भी बाधा आए, ये अपनी शेप और स्ट्रक्चर को बनाए रखते हैं। यही खासियत इन्हें डेटा ट्रांसमिशन के लिए परफेक्ट बनाती है। सोचिए, एक ऐसा सिग्नल जो लंबी दूरी तक बिना खराब हुए पहुंच जाए, यही तो future की जरूरत है।
किसने की यह खोज?
ली न्यू और जुएक्विआन झांग की अगुवाई में चीन की तियानजिन यूनिवर्सिटी की टीम ने यह कमाल किया है। उन्होंने एडवांस्ड लेजर्स और नैनोस्केल मेटासर्फेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल ऑप्टिका में पब्लिश हुई है। टीम ने फिजिक्स, मैटेरियल्स साइंस और इंजीनियरिंग को मिलाकर टेराहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी पर रोशनी को मैनिपुलेट करने के बिल्कुल नए तरीके डेवलप किए हैं।
उनका मकसद था, स्टेबल और स्विचेबल लाइट स्ट्रक्चर्स बनाना, जो भरोसेमंद तरीके से इंफॉर्मेशन कैरी कर सकें और उन्होंने यह कर दिखाया।
मेटासर्फेस का जादुई खेल-
इस पूरी खोज का राज छुपा है, एक स्पेशल नैनोस्केल सर्फेस में, जिसे मेटासर्फेस कहते हैं। यह सतह रोशनी को बिल्कुल अनोखे तरीके से कंट्रोल करती है। जब लेज़र्स इस मेटासर्फेस पर टकराते हैं, तो टोरॉइडल लाइट पल्स यानी गोलाकार रोशनी की तरंगें बनती हैं। इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है, कि वैज्ञानिक इलेक्ट्रिक-मोड और मैग्नेटिक-मोड लाइट के बीच आसानी से स्विच कर सकते हैं।
यह स्विचिंग इतनी प्रिसाइज़ और कंट्रोलेबल है, कि इसे समझाने के लिए वैज्ञानिक कहते हैं, “यह बिल्कुल वैसे है जैसे हवा में किसी छोटे से इंविज़िबल लाइट स्विच को ऑन-ऑफ करना।” यह टेक्नोलॉजी कितनी एडवांस्ड है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।
वायरलेस का भविष्य बदल सकता है यह-
स्काइर्मियन्स डेटा को एनकोड और ट्रांसमिट करने का एकदम नया और रैवॉल्यूशनरी तरीका पेश करते हैं। इनकी सबसे बड़ी ताकत है इनकी स्टेबिलिटी। ये सिग्नल्स को लंबी दूरी तक बिना किसी नुकसान के पहुंचा सकते हैं, जो पारंपरिक वायरलेस कम्युनिकेशन मैथड्स के लिए एक बड़ी चुनौती है।
वैज्ञानिकों का दावा है, कि यह हाई-फ्रीक्वेंसी टेराहर्ट्ज नेटवर्क्स में क्रांति ला सकता है। यह टेक्नोलॉजी एक ही डिवाइस में फिजिक्स, ऑप्टिक्स और मैटेरियल्स साइंस को कंबाइन करती है। यह खोज प्रोग्रामेबल लाइट-बेस्ड टेक्नोलॉजी के लिए नींव रख सकती है।
कहां-कहां होगा इस्तेमाल?
भविष्य में स्काइर्मियन्स भारी मात्रा में डेटा कैरी कर सकते हैं। ये तेज और ज्यादा सिक्योर वायरलेस कम्युनिकेशन को पॉसिबल बनाएंगे। इसके एप्लिकेशन की लिस्ट लंबी है, हाई-स्पीड इंटरनेट, सैटेलाइट लिंक्स, नेक्स्ट-जेनरेशन स्मार्टफोन्स और IoT डिवाइसेज।
सबसे अच्छी बात यह है, कि यह टेक्नोलॉजी कॉम्पैक्ट और एनर्जी-एफिशिएंट है। यह भविष्य के वायरलेस डिवाइसेज में आसानी से फिट हो सकती है। यह टेराहर्ट्ज-बैंड वायरलेस सिस्टम्स का कोर कॉम्पोनेंट बन सकती है।
कल्पना कीजिए, आपका मोबाइल डेटा डोनट के आकार की रोशनी की किरणों के जरिए ट्रैवल कर रहा है। सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यही तो फ्यूचर है।
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नया युग शुरू होने को तैयार-
यह रिसर्च एक ऐसी दुनिया की झलक दिखाती है, जहां रोशनी सीधे इंफॉर्मेशन कैरी करेगी। जहां ट्रैडिशनस रेडियो वेव की जगह लाइट-बेस्ड सिग्नल्स लेंगे। वायरलेस का भविष्य शायद सच में रोशनी के इर्द-गिर्द ही घूमने वाला है। यह छोटा सा डोनट के आकार का पैटर्न टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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