India AI Impact Summit: दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में मंगलवार को एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। ग्रेटर नोएडा की गैलगोटियास यूनिवर्सिटी ने इस हाई-प्रोफाइल इवेंट में एक रोबोटिक डॉग पेश किया और दावा किया, कि इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सेलेंस ने खुद तैयार किया है। इस रोबोडॉग का नाम रखा गया था “ओरियन”।
लेकिन जैसे ही सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, राज़ खुल गया, यह असल में चीनी कंपनी यूनिट्री का “गो2” मॉडल था, जो ऑनलाइन मार्केट में सिर्फ 2 से 3 लाख रुपये में आसानी से मिल जाता है।
प्रोफेसर का दावा और सोशल मीडिया पर बवाल-
वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर “ओरियन” की तरफ इशारा करते हुए कहती है. “यह ओरियन है और इसे हमारे सेंटर ऑफ एक्सेलेंस ने डेवलप किया है।” उन्होंने यह भी दावा किया, कि यह रोबोडॉग कैंपस में ऑटोनॉमसली घूम सकता है और अलग-अलग काम कर सकता है।
This is Unitree Go2, an AI-powered Chinese robo dog that you can buy from Chinese websites for ₹2–3 lakh.
— THE SKIN DOCTOR (@theskindoctor13) February 17, 2026
Galgotias University, Gr Noida, presented it as their multi-crore AI innovation by naming it Orion at the AI Summit. Even Ashwini Vaishnaw, the concerned minister, used… pic.twitter.com/0ZoIAJCors
साथ ही उन्होंने कहा, कि गैलगोटियास प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ में पहली है, जो एआई में 350 करोड़ रुपये से ज़्यादा इन्वेस्ट कर रही है। लेकिन जैसे ही टेक एक्सपर्ट्स ने रोबोडॉग को पहचाना, सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की ज़बरदस्त खिंचाई शुरू हो गई।
सरकार ने लिया एक्शन, एक्सपो से बाहर किया-
टाइम्स नाउ के मुताबिक, मामला इतना गर्माया, कि गैलगोटियास यूनिवर्सिटी को एआई समिट एक्सपो से तुरंत बाहर जाने को कह दिया गया। यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला ग्लोबल एआई समिट है, जिसमें 110 से ज़्यादा देश, 30 इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन और करीब 45 मंत्री शामिल हैं। इतने बड़े मंच पर इस तरह की हरकत ने देश की साख पर सवाल खड़े कर दिए।
यूनिवर्सिटी ने दी सफाई, पर नहीं माना कोई-
विवाद बढ़ता देख गैलगोटियास यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया पर एक सफाई जारी की। यूनिवर्सिटी ने कहा, कि उन्होंने कभी नहीं कहा, कि यह रोबोडॉग उन्होंने बनाया है। यूनिवर्सिटी का कहना था, कि यूनिट्री से खरीदा गया, यह रोबोडॉग दरअसल उनके स्टूडेंट्स के लिए एक “चलती-फिरती क्लासरूम” है, जिस पर वह एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। लेकिन वायरल वीडियो में जो दावा किया गया था, वो सफाई से कहीं ज़्यादा साफ था और लोगों ने इस सफाई को ज़्यादा तवज्जो नहीं दी।
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एआई के मंच पर ‘नकल’ की कोशिश?
यह पूरा विवाद एक बड़े सवाल की तरफ इशारा करता है, क्या हम सच में एआई में आगे बढ़ रहे हैं, या सिर्फ दिखावे में? इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट जैसे वैश्विक मंच पर जहां “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना से एआई को इंसानियत की सेवा में लगाने की बात हो रही हो, वहां एक चीनी प्रोडक्ट को अपना इनोवेशन बताकर पेश करना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि उन लाखों स्टूडेंट्स के साथ भी नाइंसाफी है, जो सच में कुछ नया बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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