North Korea on Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जंग जब से शुरू हुई है, दुनिया के हर कोने से आंखें इस युद्ध पर टिकी हैं। लेकिन इस बीच एक ऐसी आवाज़ उठी जिसने सबको चौंका दिया, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की। उन्होंने साफ कहा, कि अगर ईरान में मौजूद एक भी उत्तर कोरियाई नागरिक को कोई नुकसान पहुंचा, तो उनका देश “बिना किसी हिचकिचाहट” इस युद्ध में कूद जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया, कि “इज़राइल को मिटाने के लिए एक मिसाइल ही काफी है।”
हथियार देने को तैयार, सेना भेजना मुश्किल-
किम जोंग उन ने यह भी कहा, कि अगर ईरान मांगे, तो वे मिसाइलें भेजने के लिए तैयार हैं। लेकिन जानकारों का मानना है, कि उत्तर कोरिया का सीधे युद्ध में उतरना फिलहाल संभव नहीं दिखता। सबसे बड़ी वजह यह है, कि ईरान भौगोलिक रूप से उत्तर कोरिया से बहुत दूर है, वहां सेना भेजना आसान नहीं। इसीलिए विशेषज्ञों का कहना है, कि उत्तर कोरिया पर्दे के पीछे रहकर मदद करना ज़्यादा पसंद करेगा, यानी गुप्त हथियार आपूर्ति और कूटनीतिक समर्थन तक सीमित रहेगा।
ईरान की तबाही से किम ने सीखा एक बड़ा सबक-
इस पूरे युद्ध को किम जोंग उन एक अलग नज़रिये से देख रहे हैं। उनके मन में एक सवाल है, ईरान पर हमला क्यों हुआ? और उनका जवाब साफ है, क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं थे। यही वजह है, कि इस युद्ध ने किम के अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज़ करने के इरादे को और पक्का कर दिया है। उनके लिए यह युद्ध एक चेतावनी है, जिसके पास परमाणु ताकत नहीं, वो दुश्मन के निशाने पर आ जाता है।
🚨🇰🇵🇺🇸🇮🇱🇮🇷 North Korean leader Kim Jong Un has issued a severe warning to the international coalition, stating that any harm to North Korean citizens currently in Iran will trigger his immediate entry into the war. pic.twitter.com/lhALtGf9rN
— GlobalBriefing (@globalbriefing_) March 5, 2026
रूस भी किनारे पर उत्तर कोरिया अकेला-
उत्तर कोरिया का सबसे करीबी दोस्त रूस भी इस बार चुप है। वजह यह है, कि रूस खुद यूक्रेन की जंग में उलझा हुआ है और एक और मोर्चे पर नहीं उतरना चाहता। ऐसे में उत्तर कोरिया के पास सीधे दखल देने का कोई बड़ा साझेदार भी नहीं है।
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आगे क्या होगा-
फिलहाल उत्तर कोरिया की भूमिका “कड़ी बयानबाज़ी” और “गुप्त हथियार आपूर्ति” तक सिमटी नज़र आती है। जब तक उसके अपने नागरिकों या हितों पर सीधा हमला न हो, किम जोंग उन शायद इस जंग में ताल ठोककर नहीं उतरेंगे। लेकिन उनकी एक-एक धमकी इस बात का संकेत है, कि अगर हालात बदले, तो यह युद्ध और भी बड़ा रूप ले सकता है।
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