Historical Bridges of India: भारत में अक्सर हम सड़कों और पुलों की हालत पर शिकायत करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं, कि इसी देश में ऐसे पुल भी मौजूद हैं, जो 300 से 450 साल पुराने होने के बावजूद आज भी बिना किसी बड़ी खराबी के इस्तेमाल हो रहे हैं। ये सिर्फ पत्थर और ईंट के ढांचे नहीं, बल्कि उस दौर की शानदार इंजीनियरिंग और देसी तकनीकों का जीता-जागता उदाहरण हैं। आईए जानते हैं कौन से हैं ये पुल-
असम का नामडांग स्टोन ब्रिज-

असम का नामडांग पत्थर का पुल अपने आप में एक अजूबा है। साल 1703 में अहोम राजा रुद्र सिंह के समय बना यह पुल सिर्फ एक ही विशाल पत्थर को काटकर बनाया गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है, कि आज भी इस पुल पर नेशनल हाईवे 37 गुजरता है और भारी ट्रक बिना किसी दिक्कत के निकलते हैं। उस समय सीमेंट नहीं था, इसीलिए इसे चिपचिपे चावल, अंडे और चूने जैसे देसी मटेरियल से बनाया गया था, जो आज भी अच्छी कंडीशन में है।
जौनपुर का शाही पुल-

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बना शाही पुल, जिसे अकबरी पुल भी कहा जाता है, साल 1568-69 में तैयार हुआ था। गोमती नदी पर खड़ा यह पुल करीब 450 साल बाद भी मजबूत खड़ा है। इसने कई भूकंप और भयंकर बाढ़ झेली हैं, लेकिन इसमें कोई बड़ी खराबी नहीं आई। आज भी इस पर भारी ट्रैफिक चलता है, जो इसकी क्वालिटी का सबसे बड़ा सबूत है।
मेघालय का Living Root Bridges-

अगर इंजीनियरिंग और प्रकृति का परफेक्ट कॉम्बिनेशन देखना है, तो आपको मेघालय का लिविंग रूट ब्रिज जरूर देखना चाहिए। ये पुल बनाए नहीं जाते, बल्कि उगाए जाते हैं। रबर के पेड़ों की जड़ों से तैयार ये पुल 180-200 साल पुराने हैं और खास बात यह है, कि समय के साथ ये कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत होते जाते हैं। भारी बारिश और बाढ़ भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती।
हैदराबाद का पुराना पुल-

हैदराबाद का पुराना पुल, जो 1578 में कुतुब शाही वंश के दौरान बना था, शहर का सबसे पुराना पुल माना जाता है। 1908 की भयंकर बाढ़ में जब कई पुल टूट गए थे, तब भी यह पुल सुरक्षित बचा रहा। आज भी यह इतिहास और मजबूती का शानदार उदाहरण बना हुआ है।
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पुणे की सड़क जिसने नहीं देखा गड्ढा-
सिर्फ पुल ही नहीं, भारत में एक सड़क भी अपनी क्वालिटी के लिए चर्चा में रही है। पुणे की जंगली महाराज रोड के बारे में कहा जाता है, कि 1976 में बनने के बाद करीब 50 साल तक इसमें एक भी गड्ढा नहीं पड़ा। इसका सीधा मतलब यह है कि सही प्लानिंग और क्वालिटी मटेरियल से क्या कुछ संभव है।
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