Mojtaba Khamenei
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    Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद देश की सबसे ताकतवर कुर्सी खाली है। नाम तय हो चुका है, ऐलान होने ही वाला था, लेकिन अचानक सब रुक गया। वजह साफ है, इज़राइल ने खुलेआम धमकी दी है, कि जो भी नया नेता बनेगा, वो सीधा निशाने पर होगा। इसीलिए ईरान की विशेषज्ञ सभा, जिसे नया नेता चुनने का अधिकार है, चुप बैठी है। जानकारों का कहना है, कि यह देरी जानबूझकर की जा रही है, जिससे नाम सामने आते ही हमला न हो जाए।

    कौन हैं Mojtaba Khamenei?

    56 साल के Mojtaba, Ayatollah Khamenei के दूसरे बेटे हैं। वे सालों से अपने पिता के सबसे करीबी सलाहकार रहे हैं और पर्दे के पीछे रहकर देश की नीतियों को प्रभावित करते आए हैं। ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था यानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से उनके गहरे रिश्ते हैं। धार्मिक हलकों में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है, कि उन्होंने आज तक कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला, न कोई मंत्री पद, न कोई सरकारी ज़िम्मेदारी। वह हमेशा परछाईं की तरह रहे, सामने कभी नहीं आए।

    Trump ने क्यों कहा नाकाबिल-

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Mojtaba को सीधे “कमज़ोर” और “नाकाबिल” करार दिया। Trump ने कहा, “Khamenei का बेटा मुझे बिल्कुल मंज़ूर नहीं। हम ईरान में ऐसा नेता चाहते हैं, जो शांति लाए।” Trump का मानना है, कि Mojtaba के आने से ईरान में वही कट्टर नीतियां जारी रहेंगी, जो दशकों से चली आ रही हैं। उन्होंने यहां तक कहा. कि जिस तरह वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को हटाकर नया नेता तय किया गया, उसी तरह ईरान में भी उनकी “पसंद” होनी चाहिए। यानी ट्रंप सीधे ईरान के आंतरिक मामले में दखल देने की बात कर रहे हैं।

    इज़राइल की खुली धमकी-

    इज़राइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने सोशल मीडिया पर लिखा, कि नया सर्वोच्च नेता “खात्मे का सीधा निशाना” होगा। बात यहीं नहीं रुकी, इज़राइल ने Qom शहर में उस इमारत पर बमबारी भी कर दी जहां विशेषज्ञ सभा की बैठक चल रही थी। इज़राइल को डर है, कि Mojtaba के आने से ईरान और भी आक्रामक हो जाएगा और हिज़बुल्ला जैसे गुटों को और मज़बूती मिलेगी।

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    ईरान का निज़ाम-

    Trump और इज़राइल चाहे जितना दबाव बनाएं, ईरान का शासन तंत्र किसी एक इंसान पर नहीं टिका। यहां सत्ता सेना, सुरक्षा परिषद और धार्मिक संस्थाओं के पूरे जाल में बंटी है। Khamenei की मौत के बाद भी यह ढांचा बरकरार है। असली सवाल यह नहीं, कि नेता कौन बनेगा, असली सवाल यह है, कि जो भी बनेगा, क्या वो ज़िंदा रह पाएगा।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।