Sarvam AI
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    Sarvam AI: कल्पना कीजिए, कि एक ऐसा AI assistant हो जो न महंगे स्मार्टफोन की ज़रूरत हो, न इंटरनेट की, बस एक साधारण सा Nokia जैसा बटन वाला फोन हो और आप उससे अपनी भाषा में बात कर सकें। यह सपना अब हकीकत बनने की राह पर है। बेंगलुरु की कंपनी Sarvam AI ने दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit में एक ऐसा ही कमाल का AI सिस्टम दुनिया के सामने पेश किया है, जिसने सबको चौंका दिया।

    क्या है Sarvam का नया कमाल?

    Sarvam AI ने इस समिट में दो नए बड़े भाषा मॉडल, बेहतर आवाज़ और दृश्य प्रणाली और एक AI assistant लॉन्च किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही, कि यह असिस्टेंट एक साधारण बटन वाले फोन पर बिना इंटरनेट के सीधे फोन कॉल के ज़रिए काम करता दिखाया गया।

    कंपनी ने इसे Sarvam Edge नाम दिया है, एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो दूर के डाटा सेंटर पर निर्भर रहने की बजाय सीधे आपके फोन या लैपटॉप पर काम करता है। इससे बोली पहचान, अनुवाद और टैक्ट-टू-स्पीच जैसी सुविधाएं कमज़ोर या बिना नेटवर्क वाले इलाकों में भी मिल सकेंगी।

    एक अरब भारतीयों तक AI पहुंचाने का सपना-

    Sarvam AI के प्रोडक्ट मैनेजर आदित्य धावला ने कहा, “हम एक अरब भारतीयों की सेवा करना चाहते हैं और इसके लिए छोटे, कुशल मॉडल बेहद ज़रूरी हैं।” विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में अभी भी सिर्फ 71 फीसदी लोगों के पास इंटरनेट की पहुंच है। ऐसे में भारत के दूरदराज़ इलाकों में जहां नेटवर्क आज भी भरोसेमंद नहीं है, यह तकनीक एक बड़ा बदलाव ला सकती है। कंपनी ने HMD यानी Nokia ब्रांड की लाइसेंसी कंपनी और चिप मेकर Qualcomm के साथ मिलकर इसे सस्ते प्रोसेसर पर बेहतर बनाने का काम शुरू किया है।

    न cloud का खर्च, न privacy का डर-

    Sarvam का कहना है, कि डिवाइस पर AI चलाने से बार-बार क्लाउड का खर्च नहीं आता और आपका डेटा भी पूरी तरह सुरक्षित रहता है। कंपनी ने अपने ब्लॉग में लिखा, कि यूज़र्स की कोई भी जानकारी किसी सर्वर पर नहीं जाती और न ही कोई डाटाबेस उनकी बातें स्टोर करता है। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है, जो अपनी प्राइवेसी को लेकर परेशान रहते हैं।

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    भारत की AI संप्रभुता की लड़ाई-

    यह समिट पहली बार ग्लोबल साउथ में आयोजित हुई और भारत ने इसे अमेरिका और चीन के दबदबे के बीच खुद को AI की दुनिया में स्थापित करने के मौके के रूप में इस्तेमाल किया। Sarvam के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने साफ कहा, कि भारत की AI संप्रभुता एक विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है, वरना हम दूसरे देशों पर निर्भर एक डिजिटल उपनिवेश बन जाएंगे। कॉर्नल टेक के प्रोफेसर करण गिरोत्रा का मानना है, कि अगर Sarvam यह क्षमता नियंत्रित डेमो से आगे सस्ते उपकरणों पर भी साबित कर दे, तो इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक नहीं, बल्कि पूरी दुनिया तक हो सकती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।