Raghav Chadha
    Photo Source - Google

    Raghav Chadha: भारत में हर दिन करोड़ों लोग मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, कि जो डेटा आप इस्तेमाल नहीं कर पाते, वो आखिर चला कहां जाता है? इसी मुद्दे को लेकर Raghav Chadha ने सोमवार को Rajya Sabha में एक अहम सवाल उठाया, जिसने आम लोगों से जुड़ी एक बड़ी समस्या को सामने ला दिया।

    पैसे पूरे, डेटा अधूरा-

    राघव चड्ढा ने बताया कि ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां अपने प्रीपेड प्लान्स में रोजाना 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा देती हैं। लेकिन अगर यूजर पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो बचा हुआ हिस्सा दिन खत्म होते ही खत्म हो जाता है। यानी आपने 2GB के पैसे दिए, 1.5GB इस्तेमाल किया, तो बाकी 0.5GB बिना किसी रिफंड या रोलओवर के गायब हो जाता है।

    उन्होंने इसे सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि “पॉलिसी से जुड़ी समस्या” बताया। उनके मुताबिक, जब उपभोक्ता ने डेटा के पैसे दे दिए हैं, तो उसका पूरा अधिकार उसे मिलना चाहिए।

    डेटा आपका है, खत्म क्यों हो?

    इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी बात विस्तार से रखी। उन्होंने सवाल किया, कि आखिर यूजर्स को उनके खरीदे हुए डेटा से वंचित क्यों किया जाता है? उन्होंने कहा, कि डेटा को एक कंज्यूमर एसेट की तरह देखा जाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे डिजिटल पैसे होते हैं। अगर आपने डेटा खरीदा है, तो वो खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि आपके पास ही रहना चाहिए।

    क्या हो सकते हैं समाधान?

    राघव चड्ढा ने इस समस्या के समाधान के लिए कुछ अहम सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा, कि अनयूज्ड डेटा को अगले दिन में कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि यूजर्स अपने पूरे डेटा का इस्तेमाल कर सकें।

    इसके अलावा उन्होंने यह भी सुझाव दिया, कि जो यूजर्स बार-बार अपने डेटा का पूरा उपयोग नहीं कर पाते, उनके लिए अलग से प्राइसिंग सिस्टम होना चाहिए। इससे लोगों को अनावश्यक खर्च से बचाया जा सकता है। उन्होंने एक और दिलचस्प सुझाव दिया, कि डेटा को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने की सुविधा भी होनी चाहिए, जैसे हम डिजिटल पेमेंट्स करते हैं।

    सिर्फ डेटा ही नहीं और भी बड़े मुद्दे उठाए-

    यह पहली बार नहीं है, जब राघव चड्ढा ने आम जनता से जुड़े मुद्दे संसद में उठाए हों। 16 मार्च को अपने भाषण “I Do Not Oppose, I Rise to Propose” में उन्होंने कई बड़े सुधारों की बात की थी। उन्होंने शादीशुदा कपल्स के लिए इनकम टैक्स में जॉइंट फाइलिंग का विकल्प देने, घायल सैनिकों की पेंशन पर पूरी टैक्स छूट बहाल करने और बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को खत्म करने जैसे सुझाव दिए।

    ये भी पढ़ें- WhatsApp ला रहा है 15 मिनट में मैसेज खुद डिलीट करने वाला फीचर, जानिए कैसे काम करेगा ये फीचर

    डिजिटल इंडिया के दौर में जरूरी बहस-

    आज जब भारत तेजी से डिजिटल हो रहा है, इंटरनेट और डेटा हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में डेटा का यूं खत्म हो जाना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। राघव चड्ढा का यह मुद्दा न सिर्फ टेलीकॉम कंपनियों की पॉलिसी पर सवाल उठाता है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर भी एक नई बहस शुरू करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा, कि सरकार और कंपनियां इस पर क्या कदम उठाती हैं।

    ये भी पढ़ें- WhatsApp का नया AI फीचर Message Summaries, हजारों मैसेज को सेकंडों में समझें, जानें कैसे

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।