Justice on Street
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    Justice on Street: न्याय की कहानियां अक्सर कोर्टरूम की चारदीवारी में बंद रहती हैं, लेकिन पटना में सोमवार को जो हुआ, वो किसी फिल्म के सीन से कम नहीं था। स्पेशल सीबीआई कोर्ट के जज अविनाश कुमार अपनी कुर्सी और कोर्टरूम छोड़कर सड़क पर उतर आए, सिर्फ इसलिए, कि एक 95 साल का बुजुर्ग आरोपी कोर्ट तक चलकर आने में असमर्थ था। पटना सिविल कोर्ट के बाहर की वो सड़क करीब 35 मिनट के लिए एक अस्थायी अदालत में तब्दील हो गई और यहीं 15 साल पुराने बैंक फ्रॉड केस का आखिरी फैसला सुनाया गया।

    गाड़ी के अंदर लेटा था आरोपी-

    जय नारायण सिंह उम्र 95 साल, शरीर इतना कमज़ोर, कि एक कदम भी चलना नामुमकिन था। वो गाड़ी के अंदर लेटे हुए थे, पाँव हिलाने की भी ताकत नहीं बची थी। ऐसे में जज अविनाश कुमार खुद उनके पास आए और सड़क के किनारे बैठकर पूरी सुनवाई की। जय नारायण ने हाथ जोड़कर अपना गुनाह कबूल किया और कोर्ट से रहम की गुज़ारिश की। यह नज़ारा देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं।

    क्या था 15 साल पुराना मामला?

    यह केस साल 2011 में सीबीआई ने दर्ज किया था। आरोप था, कि झारखंड के जामुई जिले में यूको बैंक के कुछ कर्मचारियों और फर्जी कर्जदारों ने मिलकर कृषि लोन योजना के नाम पर सरकारी पैसों की हेराफेरी की। जय नारायण सिंह पर आरोप था, कि उन्होंने जाली दस्तावेजों के ज़रिए ट्रैक्टर खरीदने के लिए करीब 4 लाख रुपये का फर्जी लोन लिया था। यह मामला डेढ़ दशक तक कोर्ट में चलता रहा और अब जाकर इसका अंत हुआ।

    कानून सख्त, लेकिन इंसानियत और भी बड़ी-

    जज ने जय नारायण को दोषी तो माना, लेकिन सजा सुनाते वक्त उनकी उम्र, बीमारी और इस बात को ध्यान में रखा, कि उन्होंने बैंक का पूरा पैसा वापस कर दिया था। नतीजा जेल की सजा नहीं, बस 2,000 रुपये का मामूली जुर्माना लगाकर केस बंद कर दिया गया। वकील शैलेश कुमार, जो उस वक्त वहां मौजूद थे, उन्होंने बताया, कि पूरी सुनवाई के दौरान जय नारायण लेटे रहे और हाथ जोड़कर माफी मांगते रहे।

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    न्याय का एक नया चेहरा-

    इस पूरे वाकये ने यह साबित किया, कि न्याय सिर्फ कागज़ों और कोर्टरूम तक सीमित नहीं है, जब ज़रूरत हो, तो न्याय खुद चलकर इंसान के पास आ सकता है। जज अविनाश कुमार का यह कदम सिस्टम के उस पहलू को सामने लाया, जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं। एक बुजुर्ग, कमज़ोर इंसान के लिए पूरी न्यायिक प्रक्रिया सड़क पर उतर आई, यह कहानी सालों तक याद रखी जाएगी।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।