Bihar Election Boycott
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    Bihar Election Boycott: राजधानी दिल्ली में सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए और आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के संभावित बॉयकॉट की चर्चा भी हुई।

    इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने तीन हफ्ते पहले चुनाव बॉयकॉट की संभावना जताई थी। अब इस मुद्दे को लेकर राजद के मनोज कुमार झा ने स्पष्टीकरण दिया है।

    तेजस्वी यादव के बयान का संदर्भ-

    राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने स्पष्ट किया, कि तेजस्वी यादव का चुनाव बॉयकॉट का बयान किसी विशेष परिस्थिति में था। झा ने कहा, “आपको देखना होगा, कि तेजस्वी जी ने किस माहौल में संभावित बॉयकॉट की बात कही थी। हम कोई भी कठोर कदम उठाने से पहले सभी तरीकों को अपना रहे हैं। हमने पहले से ही चुनाव आयोग के पास जाकर अपनी बात रखी है, लेकिन वो अब तक अड़ा हुआ है।”

    तीन हफ्ते पहले तेजस्वी यादव ने एक समाचार एजेंसी से कहा था, “अगर राज्य के चुनाव पक्षपातपूर्ण और हेराफेरी के साथ कराए जाते हैं, जहां पहले से तय है, कि कौन कितनी सीटें जीतेगा, तो ऐसे चुनाव का क्या फायदा? हम लोगों और गठबंधन के साझीदारों से राय लेकर बिहार के आने वाले विधानसभा चुनाव का बॉयकॉट करने पर विचार कर सकते हैं।”

    चुनाव आयोग पर आरोप-

    मनोज झा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, कि “चुनाव आयोग ने हमारी बात सुनी तो है, लेकिन हमारी सुनी नहीं है। उन्होंने कहा, कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता की छवि बनाए रखनी चाहिए। चुनाव आयोग को यह दावा नहीं करना चाहिए, कि सभी पार्टियां उसके लिए बराबर हैं, यह उसके आचरण में दिखना चाहिए। झा ने आगे कहा, “लेकिन मुझे यकीन है कि चुनाव आयोग को समझ आएगा, कि एक और दिन भी होता है, जिसे कल कहते हैं! यह टिप्पणी चुनाव आयोग के लिए एक तरह की चेतावनी भी मानी जा रही है।

    जनता की राय से होगा फैसला-

    चुनाव बॉयकॉट के सवाल पर झा ने कहा, “हम वही करते हैं जो जनता चाहती है। अभी हमें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है। हमें यह भी उम्मीद है, कि चुनाव आयोग भविष्य के लिए अपनी निष्पक्षता की छवि बनाए रखना चाहता है।” उन्होंने स्पष्ट किया, कि अगर बॉयकॉट का फैसला लेना होगा तो “यह यहां मौजूद पार्टियों द्वारा जनता से सलाह के बाद तय किया जाएगा। हम लोगों के प्रतिनिधि हैं और जनता ही फैसला करती है।”

    मुख्य चुनाव आयुक्त के बयान का जवाब-

    यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रविवार के बयान के जवाब में आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर गलत जानकारी और झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। इसका जवाब देते हुए, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया, कि चुनाव आयोग “उन अधिकारियों के हाथों में है जो पक्ष ले रहे हैं।” कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया, कि चुनाव आयोग विपक्ष द्वारा लगाए गए, किसी भी आरोप की जांच नहीं कर रहा।

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    दो मोर्चों पर लड़ाई-

    यह मुद्दा दो स्तरों पर है। पहला, चुनाव वाले बिहार में चल रहे, मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन, जिसे विपक्ष चुनिंदा बता रहा है। दूसरा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा 2024 लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र, हरियाणा तथा अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों के “चौंकाने वाले” परिणामों के बारे में लगाए गए व्यापक आरोप।

    चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से सबूतों के साथ शपथपत्र देने को कहा है, जिसके जवाब में उन्होंने कहा है, कि उन्होंने केवल चुनाव आयोग के अपने रिकॉर्ड को दिखाया है। गांधी ने “लाखों फर्जी मतदाताओं, कई वोटर आईडी और फर्जी पतों” का आरोप लगाया है। इस पूरे विवाद में एक बात साफ है, कि विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच का टकराव बढ़ता जा रहा है। बिहार चुनाव अभी कुछ महीनों दूर है, लेकिन अगर स्थिति यही रही तो यह एक बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है।

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