Whey Protein Vs Soya
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    Whey Protein Vs Soya: आज के दौर में फिटनेस एक ट्रेंड बन गया है और हर कोई अपनी सेहत पर खास ध्यान दे रहा है। जिम जाने वाले लोगों से लेकर घर पर वर्कआउट करने वाले हर किसी की जुबान पर एक ही बात है हाई प्रोटीन डाइट। लोग हाई प्रोटीन मिल्क, हाई प्रोटीन स्नैक्स और तरह-तरह के प्रोटीन सप्लीमेंट का सेवन कर रहे हैं। खासकर फिटनेस फ्रीक लोग तो प्रोटीन पाउडर को अपनी डाइट का अहम हिस्सा बना चुके हैं।

    लेकिन जब बात आती है प्रोटीन सप्लीमेंट चुनने की तो ज्यादातर लोग कन्फ्यूजन में फंस जाते हैं। मार्केट में व्हे प्रोटीन और सोया प्रोटीन दोनों ही खूब पॉपुलर हैं और दोनों के अपने फायदे हैं। ऐसे में सवाल उठता है, कि आखिर कौन सा प्रोटीन आपकी सेहत के लिए सही है और कौन सा आपको आपके फिटनेस गोल्स अचीव करने में मदद करेगा। अगर आप भी इस कन्फ्यूजन में फंसे हुए हैं तो परेशान न हों, आज हम आपको दोनों प्रोटीन के बारे में डिटेल में बताएंगे ताकि आप अपने लिए बेस्ट प्रोटीन प्रोडक्ट चुन सकें।

    व्हे प्रोटीन क्या है और कैसे बनता है-

    व्हे प्रोटीन दरअसल गाय के दूध से मिलता है। गाय के दूध में दो तरह के प्रोटीन होते हैं व्हे और केसिन। जब दूध से पनीर बनाया जाता है तो केसिन अलग हो जाता है और जो लिक्विड बचता है उसमें व्हे प्रोटीन होता है। इस व्हे प्रोटीन को प्रोसेस करके पाउडर फॉर्म में बनाया जाता है। व्हे प्रोटीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड मौजूद होते हैं जो मसल्स रिकवरी और ग्रोथ में बहुत मदद करते हैं।

    साथ ही यह फैट घटाने में भी काफी इफेक्टिव होता है। व्हे प्रोटीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बहुत तेजी से अब्जॉर्ब होता है यानी वर्कआउट के बाद जब आपकी मसल्स को तुरंत प्रोटीन की जरूरत होती है तो व्हे प्रोटीन शरीर में झटपट पच जाता है और मसल्स तक पहुंच जाता है। इसी वजह से व्हे प्रोटीन को बॉडीबिल्डिंग का बेस्ट सप्लीमेंट माना जाता है। हालांकि एक समस्या यह है, कि व्हे प्रोटीन मिल्क बेस्ड प्रोडक्ट है। इसलिए जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस की प्रॉब्लम है यानी जिन्हें दूध से एलर्जी होती है उनके लिए यह सही ऑपशन नहीं है।

    सोया प्रोटीन क्या है और क्यों है खास-

    सोया प्रोटीन उन लोगों के लिए परफेक्ट चॉइस है, जो एनिमल बेस्ड प्रोटीन की जगह प्लांट बेस्ड प्रोटीन लेना पसंद करते हैं। सोया प्रोटीन सोयाबीन से बनता है और यह पूरी तरह से वेजिटेरियन है। सोया प्रोटीन की खासियत यह है कि इसमें भी सभी नौ जरूरी अमीनो एसिड मौजूद होते हैं जो मसल्स बनाने के लिए जरूरी हैं। साथ ही इसमें ग्लूटामिन और आर्जिनिन की मात्रा भी काफी अच्छी होती है।

    नब्बे प्रतिशत प्रोटीन वाले सोया प्रोटीन पाउडर में बाकी के दस प्रतिशत में जरूरी फैटी एसिड, फाइबर और विटामिन होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं। सोया प्रोटीन बनाने के लिए सोयाबीन को पहले बारीक पीसा जाता है और फिर प्रोसेसिंग के दौरान कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और फैट को हटा दिया जाता है जिससे निन्यानवे से सौ प्रतिशत प्योर प्रोटीन आइसोलेट मिलता है।

    सोया प्रोटीन में अक्सर एक्स्ट्रा न्यूट्रिएंट्स मिलाए जाते हैं, जिससे इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू, टेक्सचर और टेस्ट बेहतर हो सके। सोया प्रोटीन एकमात्र ऐसा प्लांट बेस्ड प्रोटीन है, जो व्हे प्रोटीन के जैसे ही लीन मसल्स टिश्यू को बढ़ाता है। हालांकि सोया में कार्बोहाइड्रेट और फैट की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है। लेकिन इसमें मौजूद ज्यादातर कार्ब्स फाइबर वाले होते हैं और फैट अनसैटुरेटेड होता है जो शरीर के लिए हेल्दी है। साथ ही इसमें जरूरी ओमेगा थ्री फैटी एसिड भी भरपूर मात्रा में होता है।

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    दोनों में से कौन सा है बेस्ट-

    मसल्स गेन करने के लिए दोनों ही प्रोटीन काफी इफेक्टिव हैं, लेकिन व्हे प्रोटीन और सोया प्रोटीन के बीच कई अहम अंतर हैं। प्लांट बेस्ड और एनिमल बेस्ड होने के अलावा भी कई फैक्टर हैं, जो दोनों को एक दूसरे से अलग करते हैं। जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ न्यूट्रिशन में पब्लिश हुई एक रिसर्च के मुताबिक, सोया प्रोटीन के सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम हो सकता है। हालांकि कुछ दूसरी रिसर्च इस बात को गलत भी बताती हैं। व्हे प्रोटीन को बेहतर ऑपशन इसलिए माना जाता है क्योंकि यह टेस्टोस्टेरोन लेवल को नेगेटिवली इफेक्ट नहीं करता।

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    डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें।

    By Juliee Chaurasia

    जूली चौरसिया एक अनुभवी न्यूज़ राइटर हैं, जो समसामयिक घटनाओं, ज्योतिष, ऑटोमोबाइल, वायरल खबरों और सामाजिक मुद्दों पर सरल और तथ्यात्मक लेखन के लिए जाने जाते हैं। इन्हें जटिल विषयों को भी आसान और पाठकों से जुड़ी भाषा में प्रस्तुत करने की विशेष कला आती है।डिजिटल मीडिया में कई वर्षों का अनुभव रखते हुए, ये हमेशा ट्रेंडिंग और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक तेजी और सटीकता के साथ पहुँचाने पर जोर देते हैं। इनका उद्देश्य है कि हर खबर सिर्फ सूचना न दे, बल्कि पाठकों को समझ और जागरूकता भी प्रदान करे।