Brain Health Diet: क्या आपको लगता है, कि उम्र के साथ दिमाग का कमजोर होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है? अमेरिका की मशहूर डॉक्टर हेदर सैंडिसन का कहना है, कि यह बिल्कुल जरूरी नहीं है। 15 साल तक दिमाग की बीमारियों का अध्ययन करने वाली और 5 साल तक याददाश्त देखभाल केंद्र की मुख्य चिकित्सक रही डॉक्टर सैंडिसन का मानना है कि सही खाना खाकर हम अपने दिमाग को लंबे समय तक जवां, तेज़ और ऊर्जावान रख सकते हैं।
दिमाग की जरूरतें समझना जरूरी-
मनी कंट्रोल के मुताबिक, डॉक्टर सैंडिसन बताती हैं, कि हमें अपने दिमाग को वह पोषक तत्व देने चाहिए, जिनकी उसे जरूरत है। ये पोषक तत्व दिमाग को ठीक करने, कोशिकाओं की मरम्मत करने, जहरीले पदार्थों से लड़ने और न्यूरोट्रांसमीटर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग जितनी देर तक हो सके उतनी देर तक जवां, तेज़ और ऊर्जावान बना रह सकता है। एक दिलचस्प बात यह है, कि हमारे शरीर के कुल वजन का सिर्फ 2 प्रतिशत हिस्सा दिमाग का होता है, लेकिन यह हमारी रोजाना की 20 प्रतिशत से ज्यादा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। यही कारण है, कि दिमाग के लिए सही खाना चुनना इतना महत्वपूर्ण है।
कार्बोहाइड्रेट का संतुलन क्यों जरूरी-
डॉक्टर सैंडिसन के अनुसार, पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाने के साथ-साथ कम कार्बोहाइड्रेट लेना भी बहुत जरूरी है। इससे खून में शुगर की मात्रा स्थिर रहती है और उसमें अचानक से तेज़ी से बढ़ने-घटने वाली स्थिति नहीं होती। जब खून में शुगर की मात्रा में अचानक से बदलाव होता है, तो इससे कई परेशानियां होती हैं, जैसे कि चक्कर आना, बेचैनी, थकान, चिड़चिड़ाहट और ध्यान न लगा पाना। यह सब लक्षण हमारे रोजमर्रा के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करते हैं और काम करने की क्षमता घटाते हैं। अगर आप अपने खाने में सिर्फ एक बदलाव करना चाहते हैं, तो डॉक्टर सैंडिसन कहती हैं, कि कार्बोहाइड्रेट के प्रति जागरूकता बढ़ाना शुरू करें। मतलब यह जानना शुरू करें, कि आप कितने कार्बोहाइड्रेट ले रहे हैं और धीरे-धीरे उन्हें कम कार्बोहाइड्रेट वाले विकल्पों से बदलना शुरू करें।
रोजाना कितने कार्बोहाइड्रेट चाहिए-
डॉक्टर का कहना है, कि दिन में 130 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लेना स्वस्थ है। लेकिन वह यह भी सलाह देती हैं, कि हर ग्राम को गिनने में बहुत ज्यादा परेशान न हों, क्योंकि इससे तनाव बढ़ सकता है। बस सजग रहें, कि आप क्या खा रहे हैं। यह तरीका बहुत व्यावहारिक है, क्योंकि ज्यादातर लोग बहुत सख्त आहार योजनाओं को लंबे समय तक नहीं अपना पाते। लेकिन अगर आप सिर्फ जागरूकता बढ़ाकर समझदारी से चुनाव करना शुरू कर दें, तो यह टिकाऊ जीवनशैली में बदलाव बन सकता है।
आसान आहार बदलाव जो जिंदगी बदल देंगे-
डॉक्टर सैंडिसन ने कुछ बहुत ही व्यावहारिक सुझाव दिए हैं, जिन्हें आज से ही अपनाना शुरू किया जा सकता है। वह कहती हैं, कि सैंडविच और चिप्स खाने की बजाय सूप और सलाद चुनें। यह बदलाव न सिर्फ कार्बोहाइड्रेट कम करेगा, बल्कि आपको ज्यादा विटामिन और खनिज भी देगा।
चावल या आलू की जगह क्विनोआ या फूलगोभी के चावल का इस्तेमाल करें। यह सुझाव विशेष रूप से हमारे भारतीय खाने के लिए बहुत प्रासंगिक है, क्योंकि हम बहुत ज्यादा चावल और आलू खाते हैं। क्विनोआ एक सुपरफूड है जिसमें प्रोटीन भी होता है और यह पूरे अमीनो एसिड प्रोफाइल देता है। मिठाई के लिए आइसक्रीम की बजाय बेरीज को थोड़े से व्हिप्ड क्रीम के साथ या कुछ डार्क चॉकलेट के साथ खाएं। यह विकल्प न सिर्फ कम कार्बोहाइड्रेट देता है, बल्कि एंटीऑक्सीडेंट भी प्रदान करता है, जो दिमागी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
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व्यावहारिक सुझाव और जीवनशैली में बदलाव-
यह सभी बदलाव एक साथ करने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर सैंडिसन का मानना है, कि धीरे-धीरे छोटे-छोटे बदलाव करना बेहतर होता है। सबसे पहले अपने रोजाना के खाने को देखें और पहचानें कि आप सबसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट कहां से ले रहे हैं। फिर उन चीजों को कम कार्बोहाइड्रेट वाले स्वस्थ विकल्पों से बदलना शुरू करें। उदाहरण के लिए, अगर आप रोज नाश्ते में पराठा खाते हैं, तो सप्ताह में दो-तीन दिन उसकी जगह अंडे या दलिया खाना शुरू करें।
यह सिर्फ वजन घटाने के लिए नहीं, बल्कि दिमागी स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। जब आप अपने दिमाग को सही पोषण देंगे, तो आप महसूस करेंगे कि आपकी याददाश्त बेहतर हो रही है, मूड अच्छा रह रहा है और काम में ध्यान लगाना आसान हो गया है।
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