Iran New Supreme Leader: खामेनेई की मौत के बाद ईरान एक बड़े संकट में फंस गया है। उत्तराधिकारी का नाम तय हो चुका था, लेकिन ऐलान अटका पड़ा है और इसकी वजह है, इज़राइल का वो खुला ऐलान, कि जो भी नया नेता बनेगा, वो सीधा निशाने पर होगा। इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने साफ लिखा, कि नया सर्वोच्च नेता खात्मे का सीधा निशाना होगा। ईरान के अंदर इस धमकी के बाद हड़कंप मच गया और जानबूझकर नेता चुनने की प्रक्रिया को टाला जा रहा है।
Mojtaba पर क्यों टिकी हैं सबकी नज़रें-
खबरों के मुताबिक, खामेनेई के बेटे Mojtaba को उनके उत्तराधिकारी के तौर पर सबसे आगे माना जा रहा था। 56 साल के मोजतबा का नाम सबसे पहले उभरा, क्योंकि वे अपने पिता के करीबी माने जाते हैं और देश की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था से उनके गहरे रिश्ते हैं। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है, कि उन्होंने ज़िंदगी में कभी कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला। ऊपर से इज़राइल की जानलेवा धमकी ने उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Trump का दखल-
गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने मोजतबा को सीधे नाकाबिल और “कमज़ोर” करार दे दिया। ट्रंप ने कहा, “ये अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं। खामेनेई का बेटा एक कमज़ोर इंसान है। मुझे इस नियुक्ति में शामिल होना होगा।” ट्रंप ने यह भी जोड़ा, कि अमेरिका ईरान में ऐसा नेता चाहता है, जो शांति और सद्भाव लाए। ट्रंप ने इस पूरे मामले की तुलना वेनेजुएला से की, जहां निकोलस मादुरो को हटाने के बाद डेल्सी रोड्रिगेज़ को समर्थन दिया गया था।
Qom में विशेषज्ञ सभा की इमारत पर बमबारी-
मंगलवार को इज़राइल ने Qom शहर में उस इमारत पर बमबारी की जहां ईरान की विशेषज्ञ सभा की बैठक चल रही थी। यही वो संस्था है, जिसे ईरान में नया सर्वोच्च नेता चुनने का अधिकार है। इस हमले का मकसद साफ था, नेता चुनने की प्रक्रिया को बाधित करना। जानकारों का कहना है, कि ईरानी अधिकारी जानबूझकर फैसला टाल रहे हैं, जिससे जो भी नाम सामने आए, उस पर पहले से हमला न हो जाए।
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ईरान का निज़ाम एक इंसान से कहीं बड़ा-
ट्रंप ने भले ही वेनेजुएला से तुलना की हो, लेकिन ईरान का शासन तंत्र बिल्कुल अलग है। यहां सत्ता किसी एक शख्स पर नहीं टिकी, बल्कि सेना, सुरक्षा परिषद और धार्मिक संस्थाओं के पूरे जाल पर टिकी है। खामेनेई की मौत के बाद भी यह ढांचा बरकरार है। ईरान का इस्लामी गणराज्य हर मुश्किल में टिके रहने के लिए बना है और यही बात अमेरिका व इज़राइल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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