South Korea President India Visit: भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung 19 से 21 अप्रैल तक भारत के दौरे पर आ रहे हैं। उनके साथ फर्स्ट लेडी Kim Hea Kyung और एक हाई-लेवल डेलिगेशन भी होगा, जिसमें मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बिजनेस लीडर्स शामिल हैं। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि जून 2025 में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और पिछले आठ वर्षों में किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का पहला दौरा भी।
मोदी-ली मुलाकात से मजबूत होंगे रिश्ते-
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति ली के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेता इससे पहले G7 और G20 समिट में मिल चुके हैं, और अब यह मुलाकात भारत-दक्षिण कोरिया की “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। बातचीत के दौरान शिपबिल्डिंग, ट्रेड, निवेश, AI, सेमीकंडक्टर्स और नई टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहेगा।
कूटनीति से लेकर बिजनेस तक-
राष्ट्रपति ली के दौरे का शेड्यूल काफी व्यस्त रहने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी उनके सम्मान में लंच होस्ट करेंगे, वहीं राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा स्टेट बैंकेट आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ बैठक और दोनों देशों के बड़े कॉरपोरेट लीडर्स के साथ बिजनेस फोरम मीटिंग भी इस यात्रा का हिस्सा है।
आर्थिक रिश्तों में तेजी-
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। 2010 में लागू हुए CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) के बाद व्यापार में तेजी आई है। 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 25.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2025 के शुरुआती महीनों में ही यह 21.5 अरब डॉलर रहा। भारत से एल्यूमिनियम, आयरन, स्टील और अनाज का निर्यात होता है, जबकि दक्षिण कोरिया भारत में निवेश के मामले में 15वां सबसे बड़ा निवेशक बन चुका है।
टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर रहेगा खास फोकस-
इस बार की बातचीत में खास तौर पर AI, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने की योजना है। दोनों देश टेक्नोलॉजी सेक्टर में मिलकर काम करना चाहते हैं, जिससे न सिर्फ आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उनकी स्थिति मजबूत होगी।
वैश्विक चुनौतियों पर भी होगी चर्चा-
दौरे के दौरान पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा कोरियाई प्रायद्वीप और क्षेत्रीय शांति को लेकर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच संबंध-
भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्ते सिर्फ व्यापार या राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव भी काफी गहरा है। इस दौरे के जरिए “people-to-people connect” को और मजबूत करने की कोशिश की जाएगी, ताकि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को बेहतर समझ सकें।
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क्या बदलेगा इस दौरे से?
यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य के सहयोग की नई दिशा तय करने वाला कदम है। अगर दोनों देश अपने साझा लक्ष्यों पर आगे बढ़ते हैं, तो यह साझेदारी आने वाले समय में और भी मजबूत हो सकती है।
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