Iran Warning: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने बुधवार को राज्य टेलीविज़न पर एक बेहद आक्रामक बयान दिया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, कि अगर अमेरिका स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में नाकेबंदी जारी रखता है, तो ईरान उसके जहाज़ों को मिसाइलों से डुबो देगा। रेज़ाई, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी के पूर्व कमांडर-इन-चीफ हैं, अपने कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं।
ट्रंप को सुनाई खरी-खरी-
रेज़ाई ने ट्रंप पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “मिस्टर ट्रंप स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के पुलिसमैन बनना चाहते हैं। क्या यह सच में आपका काम है? क्या अमेरिका जैसी ताकतवर सेना का यह काम है?” उन्होंने आगे चेतावनी दी कि ईरान अमेरिका के किसी भी ज़मीनी हमले का मुँहतोड़ जवाब देगा और ऐसी कोशिश उल्टी पड़ेगी। उन्होंने बंधक बनाने की धमकी भी दी। रेज़ाई ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का भी विरोध किया।
खामेनेई का बड़ा संकेत-
पिछले हफ्ते ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने भी एक बड़ा संकेत दिया था। उन्होंने कहा, कि ईरान “स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के प्रबंधन में एक नए चरण में प्रवेश करेगा।” यह बयान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक पर ईरान के नियंत्रण को नए सिरे से परिभाषित करने की तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप का जवाब-
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि वे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को “हमेशा के लिए” खोल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने ईरान को हथियार न देने का वादा किया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस कदम से “बहुत खुश” हैं। ट्रंप ने लिखा, “चीन बहुत खुश है कि मैं स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ हमेशा के लिए खोल रहा हूं। मैं उनके लिए भी यह कर रहा हूं और पूरी दुनिया के लिए। राष्ट्रपति शी कुछ हफ्तों में जब मैं वहां जाऊंगा तो मुझे गले लगाएंगे।” उन्होंने आगे जोड़ा कि दोनों देश “मिलकर और समझदारी से काम कर रहे हैं।”
ये भी पढ़ें- जानिए कौन है Pehalwan? जिसने PM अकाउंट से की ऐसी गलती की पाकिस्तान का बन गया मज़ाक
दुनिया की सांसें अटकी हैं-
एक तरफ ईरान की खुली धमकियां, दूसरी तरफ अमेरिका की नौसेना नाकेबंदी और ट्रंप के आक्रामक बयान, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ पर दुनिया की नज़रें टिकी हैं। यह वह समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का एक बड़ा तेल और गैस व्यापार गुज़रता है। अगर यहां स्थिति और बिगड़ी तो इसका असर न सिर्फ पश्चिम एशिया पर बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और भारत जैसे देश जो इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात करते हैं, उनके लिए यह और भी चिंताजनक है।
ये भी पढ़ें- जानिए 9,000 साल पुराना चीन का चावल कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा स्टेपल फूड



