Viral Video
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    Viral Video: IPL 2026 का जोश अपने चरम पर है। लोग दूर-दूर से टिकट खरीदकर, हवाई जहाज़ से उड़कर और होटलों में रुककर अपनी पसंदीदा टीम को देखने आ रहे हैं। लेकिन स्टेडियम के अंदर दाखिल होने के बाद एक और मोर्चे पर जेब ढीली होती है, खाने-पीने के दाम। इस बार गुवाहाटी के बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम से एक ऐसा वीडियो सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया। 10 अप्रैल को आरसीबी बनाम राजस्थान रॉयल्स मैच के दौरान एक फैन ने बिंगो मैड एंगल्स चिप्स के पैकेट से 100 रुपये का स्टिकर हटाया तो उसके नीचे असली एमआरपी 50 रुपये छपी हुई थी।

    स्टिकर के नीचे छुपा था सच-

    जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर आया, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई दूसरे दर्शकों ने भी ऐसे ही अनुभव साझा किए। यानी यह कोई एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि एक पैटर्न था जो स्टेडियम के अंदर चल रहा था। 50 रुपये के पैकेट पर 100 रुपये का स्टिकर लगाना, यह न सिर्फ एमआरपी नियमों का उल्लंघन है बल्कि उपभोक्ताओं के साथ सरासर धोखाधड़ी भी है।

    सोशल मीडिया पर भड़के लोग-

    इस वायरल वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ तीखी और मज़ेदार दोनों रहीं। एक यूज़र ने तंज़ कसते हुए लिखा, “घर पर बैठकर परिवार के साथ देखो, 100 रुपये में बढ़िया पकौड़े मिलेंगे।” एक अन्य ने कहा, कि यह वैसे ही है, जैसे सिनेमाघरों में पॉपकॉर्न महंगा होता है। लेकिन कई लोगों ने इसे “लूट” करार दिया और बीसीसीआई से सख्त कार्रवाई की मांग की। एक यूज़र ने लिखा, “आईपीएल मैच में जाना बंद करो। जब स्टेडियम खाली होने लगेंगे तभी बीसीसीआई जागेगी।”

    क्या यह कानूनी अपराध है?

    कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि क्या एमआरपी से ज़्यादा कीमत वसूलना कानूनी अपराध नहीं है? भारत में उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना दंडनीय अपराध है। एक यूज़र ने यह भी कहा, कि इस तरह ऊंची कीमत पर बेचकर न सिर्फ लूट होती है बल्कि जीएसटी में भी गड़बड़ी होती है। लेकिन सवाल यह है, कि जब प्रशासन को पता है और वीडियो वायरल हो रहे हैं, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं होती?

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    यह पहली बार नहीं-

    स्टेडियम, कॉन्सर्ट और धार्मिक स्थानों पर महंगे दामों पर सामान बेचना कोई नई बात नहीं है। विशेषज्ञ इसे ऑपरेशनल लागत, वेंडर कमीशन और वेन्यू एक्सक्लूसिविटी के नाम पर जायज़ ठहराते हैं। लेकिन एमआरपी पर स्टिकर लगाकर दोगुनी कीमत वसूलना यह किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता। आम दर्शक जो मेहनत की कमाई खर्च करके मैच देखने आता है, वह इस लूट का शिकार नहीं होना चाहिए।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।