Viral Video: दुबई चमक-दमक, ऊंची इमारतें और आज़ाद ज़िंदगी का एक सपना। 23 साल की सूर्या गायत्री के लिए भी यही था। केरल की यह युवा अकाउंटेंट जब दुबई में नौकरी मिलने पर कंपनी का घर भी साथ मिला, तो उसे लगा जैसे उसकी किस्मत खुल गई। उसने अपनी यह कहानी एक वीडियो में शेयर की और देखते ही देखते लाखों लोगों ने कहा, “यार यह तो हमारी अपनी कहानी है।”
शुरुआत में लगा सब परफैक्ट है-
सूर्या ने बताया, कि पहले कुछ महीने वाकई शानदार थे। खुद खाना बनाना, घर संभालना, बिना किसी की रोक-टोक के जीना, यह सब उसे आज़ादी जैसा लग रहा था। कंपनी का घर मिला था, इसलिए खर्चे भी कम थे। उसे लगा यह तो ऐसी ज़िंदगी है, जो हर किसी को नहीं मिलती। वो खुश थी, संतुष्ट थी और उत्साह से भरी थी।
फिर धीरे-धीरे उतरी खुशी-
लेकिन वक्त के साथ असलियत सामने आने लगी। सूर्या के दफ्तर में वो अकेली कर्मचारी थी, यानी पूरे दिन बात करने के लिए कोई नहीं। काम खत्म करके घर आओ, तो फिर वही चारदीवारी। न कोई दोस्त, न कोई पड़ोसी। उसका रहने का इलाका भी काफी सुनसान था, न पास में कोई चाय की दुकान, न बाज़ार, न कोई जगह जहां जाकर बैठ सकें। अकेलापन धीरे-धीरे उसे खाने लगा।
वो पल जब मन टूटने लगा-
सूर्या ने बताया, कि एक वक्त ऐसा आया, जब वो बहुत मुश्किल मानसिक दौर से गुज़री। उसे लगने लगा, जैसे वो डिप्रेशन की तरफ जा रही है। बाहर से ज़िंदगी सुंदर लग रही थी, अच्छी नौकरी, अपना घर, विदेश में रहना, लेकिन अंदर से एक खालीपन था, जो हर रोज़ गहरा होता जा रहा था। यह एहसास उन लाखों लोगों से मिलता-जुलता है, जो अपने परिवार से दूर विदेश में काम करते हैं और अंदर ही अंदर टूटते रहते हैं।
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उबरीं और सीखा-
सूर्या ने बताया, कि उन्होंने इस दौर से खुद को बाहर निकाला। उन्होंने नए तरीके ढूंढे खुद को व्यस्त रखने के, नए लोगों से मिलने के और ज़िंदगी में रंग भरने के। उनका संदेश साफ है, कंपनी का घर और अच्छी तनख्वाह ज़रूरी है, लेकिन इंसान को इंसान की ज़रूरत होती है। हर चमकती हुई ज़िंदगी के पीछे एक अनकही कहानी होती है।
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