Viral Video: भारत में इन दिनों सिविक सेंस यानी नागरिक जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। शहरों की साफ-सफाई से लेकर सार्वजनिक जगहों के उपयोग तक, हर जगह यह सवाल उठ रहा है, कि आखिर हमारी जिम्मेदारी क्या है? इसी बीच पंडित जीवराज़ श्रीमाली ने राजस्थान के जोधपुर में एक अनोखी पहल शुरू कर इस बहस को जमीन पर उतार दिया है।
आस्था और जिम्मेदारी के बीच संतुलन-
पंडित जीवराज़ श्रीमाली धार्मिक तालाबों और सरोवरों की खुद सफाई करते हैं। वे श्रद्धालुओं से अपील कर रहे हैं, कि पूजा के बाद बचे फूल, नारियल, कपड़े या अन्य सामग्री को पानी में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित डस्टबिन में डालें। उनका कहना है, कि “धर्म हमें प्रकृति की रक्षा करना सिखाता है, न कि उसे नुकसान पहुंचाना।”
सफाई अभियान के दौरान उन्हें जो चीजें मिलती हैं, वे चौंकाने वाली हैं। लोग पुराने देवी-देवताओं की तस्वीरें, मिठाइयाँ, अनाज, तेल और यहां तक कि कांच की चूड़ियों से भरी बाल्टियां और प्लास्टिक में लिपटी पुरानी चप्पलें भी तालाबों में फेंक देते हैं। कई लोग यह मानते हैं कि ऐसा करने से पुण्य मिलता है या दुर्भाग्य दूर होता है। लेकिन हकीकत यह है, कि इससे जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और जलीय जीवों की जान पर बन आती है।
‘मासूम’ चढ़ावे की असली कीमत-
अक्सर लोग सोचते हैं, कि फूल और फल तो प्राकृतिक हैं, इसलिए नुकसान नहीं करेंगे। मगर जब बड़ी मात्रा में जैविक कचरा ठहरे हुए पानी में सड़ता है, तो वह पानी में घुली ऑक्सीजन को खत्म कर देता है। इससे मछलियां और जलीय पौधे “दम घुटने” से मर जाते हैं। यानी जो चढ़ावा हमें पवित्र लगता है, वही पर्यावरण के लिए खतरा बन जाता है।
केमिकल से बनी मूर्तियों का खतरा-
हाल ही में एक वीडियो में पंडित श्रीमाली ने लोगों से केमिकल से बनी मूर्तियाँ न खरीदने की अपील की। उन्होंने साफ कहा, “शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा कि ऐसी मूर्तियों को जल में प्रवाहित करना जरूरी है।” दरअसल, ये मूर्तियाँ नॉन-बायोडिग्रेडेबल होती हैं और पानी में घुलती नहीं हैं। समय के साथ ये जहरीले तत्व छोड़ती हैं, जो पूरे इकोसिस्टम को नुकसान पहुँचाते हैं।
फोटो फ्रेम और प्लास्टिक का जाल-
प्रदूषण सिर्फ मूर्तियों तक सीमित नहीं है। तालाबों में देवी-देवताओं और पूर्वजों के फोटो फ्रेम भी बड़ी संख्या में मिलते हैं। लकड़ी सड़कर पानी को गंदा करती है, जबकि प्लास्टिक कभी नष्ट नहीं होता। यह प्लास्टिक लंबे समय तक पानी में रहकर जलीय जीवन को प्रभावित करता है।
‘कर्मकांड’ से ‘कर्म’ तक का सफर-
पाली से ताल्लुक रखने वाले पंडित जीवराज़ श्रीमाली सुंदरकांड पाठ और कर्मकांड करते हैं। उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल के अनुसार, वे जोधपुर नगर निगम के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। वे लोगों को “क्लीन एंड ग्रीन जोधपुर” बनाने के अभियान से जुड़ने का न्योता दे रहे हैं।
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उनका संदेश साफ है, आस्था जरूरी है, लेकिन अंधविश्वास नहीं। अगर हम सच में पवित्रता चाहते हैं, तो हमें अपने जल स्रोतों को साफ रखना होगा। आज जरूरत है, कि हम परंपराओं को समझदारी से निभाएं। पूजा के बाद कचरे को सही जगह डालना, इको-फ्रेंडली मूर्तियों का इस्तेमाल करना और दूसरों को जागरूक करना ही असली धर्म है। क्योंकि जब पानी बचेगा, तभी जीवन बचेगा।
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