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Navratri Day 2
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Navratri Day 9: नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि को बड़े ही उत्साह के साथ भारत में मनाया जाता है। पंचांग के मुताबिक भगवान रुद्र ने नौवे दिन शक्ति की देवी आदि-शक्ति की पूजा की। ऐसा कहा जाता है की देवी आदि शक्ति तब तक बिना किसी रूप के अस्तित्व नहीं थी, जब तक वह भगवान शिव के बाय आधे भाग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट नहीं हुईं। सिद्धिदात्री के चार हाथ हैं उनके दाहिने हाथों में गदा और चक्र है, जबकि उनके बाएं हाथों में कमल का फूल और शंख है।

उत्सव की शुरुआत-

महानवमी दुर्गा पूजा का अंतिम दिन माना जाता है, उत्सव की शुरुआत महा स्नान और पूजा से होती है। महानवमी पर देवी दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा की जाती है, जो भैंस दानव के विनाशक के रूप में उनकी भूमिका को दर्शाती है। महानवमी पूजा और उपवास का समय नवमी का दिन शुरू होने के आधार पर बदला जा सकता है। यदि आठवीं और नौवे दिन को अष्टमी के दिन दोपहर से पहले जोड़ा जाता है तो विशेष पूजा सहित अष्टमी पूजा और नवमी पूजा दोनों एक ही दिन मनाई जाती है और कन्या पूजन किया जाता है। आईए महानवमी 2023 से संबंधित शुभ समय तिथि और महत्वपूर्ण चीजों पर नजर डालते हैं।

इस साल महानवमी-

इस साल महानवमी 23 अक्टूबर सोमवार को पड़ेगी, नवमी तिथि 22 अक्टूबर को शाम 7:58 बजे शुरू होगी और 23 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे समाप्त हो जाएगी। इस दिन विशेष हवन किया जाता है एक लकड़ी के मंच पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और उस पर देवी की मूर्ति रखी जाती है। आरती और हवन अनुष्ठान किया जाता है और पूजा के बाद भगवान को भोग लगाया जाता है।

देवी सिद्धिदात्री-

नवरात्रि के नौवे दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। वह कमल पर विराजमान रहते हैं और शेर की सवारी करती हैं। ऐसा माना जाता है की देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं। इसीलिए केतु ग्रह उन्हीं से शासित होता है। मां सिद्धिदात्री को शक्ति का दिव्य स्वरुप माना जाता है और माना जाता है कि वह अपने भक्तों को सिद्धियों तृप्ति और पूर्णता का आशीर्वाद देती है। यहां तक की भगवान शिव को भी देवी सिद्धिदात्री के आशीर्वाद से ही सभी सिद्धियां प्राप्त हुई हैं। उनकी पूजा न सिर्फ मनुष्य द्वारा की जाती है, बल्कि गंधर्व, सूर्य, देव, यक्ष और सिद्धों द्वारा भी की जाती है। जब देवी सिद्धिदात्री भगवान शिव के बाएं आधे भाग में प्रकट हुईं, तो उन्हें अर्धनारीश्वर की उपाधि दी गई।

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मां सिद्धिदात्री की पसंद-

मां सिद्धिदात्री की पसंद में पीले फूल, विशेष रूप से पीले गुलाब और केले जैसे फल शामिल होते हैं। उन्हें मिठाइयों का खास शौक है। इस दिन नवरात्रि व्रत का पालन करने वाले लोग 9 युवा लड़कियों को सूजी का हलवा और सुख काला चना जैसे पारंपरिक भोजन खिलाकर समापन करते हैं। जिन्हें प्यार से कंजक या कन्या पूजन के रूप में जाना जाता है। यह 9 लड़कियां देवी दुर्गा के नौ रूपों के समान होती हैं। जिन्हें शैलपुत्री, ब्रह्मचारी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के नाम से जाना जाता है।

अनुष्ठान के मुताबिक-

अनुष्ठान के मुताबिक, कन्या पूजन की शुरुआत छोटी लड़कियों के पैर धोने की परंपरा से होती है। उसके बाद उनके माथे पर कुमकुम और चावल का तिलक लगाया जाता है। उनकी कलाई पर एक पवित्र धागा भी बांधा जाता है। फिर उन्हें प्रसाद दिया जाता है जिसमें नारियल, पूरी, हलवा और काला चना शामिल होता है।

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