Tanning Even After Applying Sunscreen: गर्मियों का मौसम आते ही हम सब एक काम बड़ी ईमानदारी से करते हैं, सनस्क्रीन लगाना। हर सुबह बाहर निकलने से पहले चेहरे और हाथों पर सनस्क्रीन लगाते हैं और मन में यह सुकून रहता है, कि हम सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षित हैं। लेकिन शाम को घर लौटने पर आईने में देखते हैं, तो चेहरा काला पड़ा हुआ मिलता है। यह देखकर मन में सवाल उठता है, जब सनस्क्रीन लगाई थी, तो टैनिंग कैसे हो गई? वी6 क्लिनिक्स की वरिष्ठ डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता राणा ने इस सवाल का विस्तार से जवाब दिया है।
सनस्क्रीन 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं देती-
अंग्रज़ी समाचार वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, डॉ. राणा ने सबसे पहले एक ज़रूरी बात स्पष्ट की, सनस्क्रीन कोई जादुई कवच नहीं है, जो सूरज की सभी किरणों को रोक दे। उन्होंने बताया, कि अधिकतर सनस्क्रीन मुख्य रूप से यूवीबी किरणों से बचाती हैं, जो सनबर्न का कारण बनती हैं।
लेकिन यूवीए किरणें जो टैनिंग और गहरे त्वचा नुकसान के लिए ज़िम्मेदार हैं, वे अभी भी अंदर तक पहुंच सकती हैं, खासकर तब जब सनस्क्रीन ब्रॉड-स्पेक्ट्रम न हो। यानी सनस्क्रीन यूवी किरणों को पूरी तरह रोकती नहीं बल्कि छानती है। इसलिए सिर्फ सनस्क्रीन पर निर्भर रहना और पूरी सुरक्षा की उम्मीद रखना, यह सोच बदलनी होगी।
कम मात्रा में लगाना और सही वक्त पर न लगाना-
डॉ. राणा के अनुसार टैनिंग की दूसरी सबसे बड़ी वजह है, सनस्क्रीन की मात्रा में कंजूसी। अधिकतर लोग ज़रूरत से बहुत कम सनस्क्रीन लगाते हैं, जिससे उसकी प्रभावशीलता काफी कम हो जाती है। उन्होंने बताया, कि चेहरे के लिए एक चाय का चम्मच और पूरे शरीर के लिए एक शॉट ग्लास के बराबर सनस्क्रीन लगानी चाहिए।
इसके अलावा एक और आम गलती है, घर से निकलते वक्त सनस्क्रीन लगाना। डॉ. राणा ने बताया, कि सनस्क्रीन को त्वचा पर असर करने के लिए वक्त चाहिए। धूप में निकलने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगानी चाहिए और अगर आप बाहर हैं, तो हर दो से तीन घंटे में दोबारा लगाना ज़रूरी है, क्योंकि पसीना और पानी इसे हटा देते हैं।
दोपहर की धूप सबसे खतरनाक-
डॉ. राणा ने यह भी बताया. कि गर्मियों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच सूरज की किरणें सबसे तेज़ होती हैं। इस दौरान ज़्यादा देर धूप में रहने पर हाई एसपीएफ सनस्क्रीन भी पूरी तरह काम नहीं कर पाती।
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सनस्क्रीन के साथ अपनाएं ये आदतें-
डॉ. राणा की सलाह है, कि कम से कम एसपीएफ 30 या उससे अधिक की ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें। कान, गर्दन और हाथों जैसी जगहें जो अक्सर छूट जाती हैं, वहां भी लगाएं। छाते, टोपी, धूप के चश्मे और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। स्किनकेयर में विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट शामिल करें, जो यूवी किरणों से होने वाले नुकसान से लड़ते हैं। डॉ. राणा का आखिरी संदेश गहरा है, “सनस्क्रीन ज़रूरी है, लेकिन यह तभी सबसे अच्छा काम करती है, जब इसे सही आदतों के साथ अपनाया जाए।”
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