UTI Effect on Brain: अब तक हम यही मानते आए हैं, कि दिमाग की सेहत सिर्फ दिमाग से जुड़ी होती है, लेकिन नई रिसर्च इस सोच को बदल रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे मुंह की सेहत और यहां तक, कि आम इंफेक्शन जैसे UTI (यूरिन इन्फेक्शन) भी हमारे ब्रेन फंक्शन पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
हाल के अध्ययनों में सामने आया है, कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद बैक्टीरिया, खासकर मुंह के बैक्टीरिया, हमारी याददाश्त, सोचने की क्षमता और यहां तक, कि डिमेंशिया जैसी बीमारियों के जोखिम को भी प्रभावित कर सकते हैं।
मुंह और दिमाग के बीच सीधा कनेक्शन-
हमारा मुंह शरीर का एक अलग हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सीधे हमारे पूरे सिस्टम से जुड़ा हुआ है। जब ओरल हेल्थ खराब होती है, जैसे मसूड़ों की बीमारी या कैविटी, तो हानिकारक बैक्टीरिया खून के जरिए शरीर में फैल सकते हैं।
ये बैक्टीरिया दिमाग तक भी पहुंच सकते हैं, खासकर तब जब उम्र या बीमारी के कारण शरीर की सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। रिसर्च में पाया गया है कि मसूड़ों की बीमारी से जुड़े कुछ बैक्टीरिया दिमाग में सूजन पैदा कर सकते हैं, जो याददाश्त कमजोर होने और मानसिक क्षमता घटने का एक बड़ा कारण है। चौंकाने वाली बात यह भी है, कि कुछ मामलों में ऐसे बैक्टीरिया अल्जाइमर के मरीजों के दिमाग में भी पाए गए हैं, जो इस कनेक्शन को और मजबूत बनाता है।
अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का खेल-
मुंह में मौजूद सभी बैक्टीरिया खराब नहीं होते। कुछ अच्छे बैक्टीरिया भी होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। ये बैक्टीरिया नाइट्रिक ऑक्साइड जैसे जरूरी तत्व बनाने में मदद करते हैं, जो दिमाग तक सही ब्लड फ्लो और सिग्नलिंग के लिए जरूरी है। लेकिन जब बुरे बैक्टीरिया हावी हो जाते हैं, तो यह बैलेंस बिगड़ जाता है और दिमाग की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।
UTI भी बन सकता है दिमाग के लिए खतरा-
सिर्फ मुंह ही नहीं, बल्कि UTI जैसी आम इंफेक्शन भी दिमाग पर असर डाल सकती है, खासकर बुजुर्गों में। UTI के दौरान शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जो पूरे शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी प्रभावित करती है।
अक्सर देखा गया है, कि बुजुर्गों में UTI होने पर अचानक कन्फ्यूजन या भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इंफेक्शन के दौरान शरीर ऐसे केमिकल रिलीज करता है, जो दिमाग के सामान्य कामकाज में बाधा डालते हैं। अगर ये इंफेक्शन बार-बार हो, तो यह लंबे समय में दिमाग की सेहत को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
सूजन है सबसे बड़ा कारण-
इन सभी समस्याओं के पीछे एक बड़ा कारण है सूजन (Inflammation)। जब शरीर लगातार किसी इंफेक्शन से लड़ता रहता है, तो यह सूजन धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। अब वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं, कि अगर इन इंफेक्शन को समय रहते कंट्रोल किया जाए, तो क्या डिमेंशिया जैसी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
छोटी-छोटी आदतें बना सकती हैं बड़ा फर्क-
इस रिसर्च का मकसद डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है। दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है, कि हम रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों को अपनाएं। अच्छी ओरल हाइजीन बनाए रखना, समय-समय पर डेंटल चेकअप करवाना, शरीर को हाइड्रेट रखना और UTI के लक्षण दिखते ही इलाज करवाना, ये सभी छोटी-छोटी चीजें लंबे समय में बड़ा फर्क डाल सकती हैं।
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शरीर का हर हिस्सा है जुड़ा हुआ-
वैज्ञानिक अभी भी इस विषय पर और रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन एक बात साफ हो रही है, दिमाग की सेहत सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं है। यह हमारे पूरे शरीर से जुड़ी हुई है, चाहे वो हमारे दांत हों या फिर कोई आम इंफेक्शन। इसलिए अगली बार जब आप अपनी हेल्थ के बारे में सोचें, तो सिर्फ दिमाग ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर का ख्याल रखें।
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