Cost of Living in India 2026: भारत में 2026 में रहना-खाना-पीना कितना महंगा हो गया है, यह जानना हो तो बस एक शहर से दूसरे शहर का सफर करके देखिए। Numbeo के मार्च 2026 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं, कि एक अकेले इंसान का महीने का ज़रूरी खर्च खाना, बिजली-पानी, आना-जाना और थोड़ा मनोरंजन बिना किराये के करीब 27,300 रुपये बैठता है और अगर चार लोगों का परिवार हो तो, यही खर्च 98,000 रुपये के करीब पहुंच जाता है। लेकिन असली बात यह है, कि यह सब इस बात पर निर्भर करता है, कि आप किस शहर में रहते हैं।
मुंबई सबसे महंगा, कोलकाता सबसे सस्ता-
बिज़नेस टूडे के मुताबिक, Numbeo ने न्यूयॉर्क को 100 का बेस मानकर भारतीय शहरों की रैंकिंग की है। इसमें मुंबई सबसे ऊपर है, जहां किराया ही सबसे बड़ा बोझ है। एक अकेले इंसान को मुंबई में बिना किराये के 30,000 से 60,000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।
दिल्ली दूसरे नंबर पर है जहां यह खर्च 22,000 से 50,000 रुपये के बीच है। पुणे और बेंगलुरु भी इसी दायरे में हैं। हैदराबाद में 12,000 से 50,000 और चेन्नई में 15,000 से 50,000 रुपये का दायरा है। कोलकाता सबसे किफायती है जहाँ यही खर्च 20,000 से 40,000 रुपये में निकल जाता है।
रोज़मर्रा का खर्च कहां जाता है पैसा?
आंकड़े बताते हैं, कि शहर के बीच में एक बेडरूम का फ्लैट किराये पर लेने पर औसतन 14,000 रुपये महीना देना पड़ता है, जबकि बाहरी इलाकों में यही करीब 9,000 रुपये में मिल जाता है। किराने का सामान अभी भी अपेक्षाकृत स्थिर है, दूध 61 रुपये लीटर, 500 ग्राम ब्रेड 39 रुपये और चावल 56 रुपये किलो।
खाना बाहर खाएं, तो एक साधारण थाली करीब 200 रुपये और दो लोगों के लिए ढंग का खाना 1,050 रुपये तक जा सकता है। आने-जाने के लिए मासिक पास करीब 800 रुपये का है और पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। 85 वर्गमीटर के घर का बिजली-पानी का बिल औसतन 3,565 रुपये महीना आता है हालाँकि दिल्ली में यह ज़्यादा हो सकता है।
पैसा कहां ज़्यादा चलता है?
अगर आप यह सोच रहे हैं, कि तनख्वाह कहां ज़्यादा काम आएगी, तो हैदराबाद और पुणे सबसे बेहतर विकल्प हैं। हैदराबाद की क्रय शक्ति 154 और पुणे की 152 है यानी यहां सैलरी ज़्यादा दूर तक जाती है। दिल्ली में किराना महंगा है क्योंकि शहरी मांग ज़्यादा है। फ्रीलांसर आने-जाने का खर्च बचा सकते हैं, जबकि परिवारों का किराने पर सबसे ज़्यादा खर्च होता है।
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2026 में बजट बनाना ज़रूरी-
खाने-पीने की चीज़ें हर साल पांच से सात फीसदी महंगी हो रही हैं और शहरों की तरफ पलायन भी बढ़ रहा है। ऐसे में चाहे आप नौकरी की तलाश में हों, परिवार के साथ नए शहर जाना चाहते हों या विदेश से भारत लौट रहे हों, यह आंकड़े आपके लिए एक सच्चा आईना हैं।
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