Kerala Name Change: बात उस वक्त की है, जब अंग्रेज इस देश पर राज करते थे। उन्होंने अपनी सुविधा के लिए कई जगहों के नाम बदले और उन्हीं में से एक था Keralam। सदियों से मलयालम भाषा में इस राज्य को Keralam कहा जाता था, लेकिन अंग्रेजों ने इसे आसान बनाने के लिए Kerala कर दिया। अब दशकों बाद, युनियन कैबिनेट ने उस पुराने नाम को वापस लाने की मंजूरी दे दी है।
आखिर नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan का कहना है, कि “Keralam” इस राज्य का असली और ऐतिहासिक नाम है। यह नाम मलयालम भाषा और यहां की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। “Kerala” नाम औपनिवेशिक दौर की देन है, जो अंग्रेजों ने प्रशासनिक कामकाज के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया था। राज्य की जनता और नेताओं का मानना है, कि अपनी असली पहचान को वापस पाना सिर्फ एक नाम बदलना नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता और विरासत का सम्मान करना है।
#Cabinet approves the proposal for alteration of name of State of ‘Kerala’ as ‘Keralam’#CabinetDecisions pic.twitter.com/NwHVPnZQfL
— Dhirendra Ojha (@DG_PIB) February 24, 2026
June 2024 से चल रही थी कोशिश-
Kerala विधानसभा ने June 2024 में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें नाम बदलने की मांग की गई थी। इससे पहले 2023 में भी एक प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसे तकनीकी कारणों से वापस कर दिया था। इस बार संशोधित प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है, जो इस पूरी कोशिश में एक बड़ा कदम है।
आगे क्या होगा?
कैबिनेट की हां के बाद अब यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास जाएगा, जो इसे Kerala विधानसभा को भेजेंगे, यह संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत जरूरी प्रक्रिया है। विधानसभा की राय आने के बाद केंद्र सरकार इसे संसद में पेश करेगी। यानी अभी रास्ता थोड़ा लंबा है, लेकिन सबसे मुश्किल मोड़ पार हो चुका है।
जब विरोधी भी साथ आ गए-
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि Kerala BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस फैसले का समर्थन किया। जहां आमतौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होते हैं, वहां इस मुद्दे पर सबने एक सुर में बात की। यह बताता है, कि “Keralam” नाम सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
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बदलेगा क्या, नहीं बदलेगा क्या?
यह बदलाव सिर्फ नाम तक सीमित है। न सीमाएं बदलेंगी, न सरकारी कामकाज का तरीका और न ही पुराने दस्तावेज अमान्य होंगे। लेकिन जो बदलेगा वो है एक पहचान, एक ऐसी पहचान जो सदियों पहले छिन गई थी और अब वापस आने की राह पर है।
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