Waqf Amendment Bill 2025
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    Waqf Amendment Bill 2025: 13 घंटे की लंबी बहस के बाद लोकसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को बहुमत से पारित कर दिया है। विपक्ष के जोरदार विरोध के बावजूद यह विधेयक अब राज्यसभा में विचार के लिए भेज दिया गया है। इस विधेयक को लेकर देश भर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां सत्तारूढ़ एनडीए इसे प्रगतिशील बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे "मुस्लिम विरोधी" और "असंवैधानिक" करार दे रहे हैं।

    वक्फ क्या है जानें इसका इतिहास और महत्व(Waqf Amendment Bill 2025)-

    वक्फ इस्लामी कानून का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके अंतर्गत कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति धार्मिक या परोपकारी उद्देश्यों के लिए समर्पित कर देता है। वक्फ घोषित की गई संपत्ति न तो विरासत में हस्तांतरित की जा सकती है, न बेची जा सकती है और न ही किसी को दान में दी जा सकती है। भारतीय कानून में, 1954 के वक्फ अधिनियम के अनुसार, वक्फ का अर्थ है किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा चल या अचल संपत्ति का स्थायी समर्पण, जिसे धार्मिक, आस्थावान या परोपकारी के रूप में मान्यता प्राप्त हो। "वक्फ संपत्ति का सीधा मतलब है 'अल्लाह की संपत्ति', जिसे किसी भी परिस्थिति में बेचा या खरीदा नहीं जा सकता," वक्फ विशेषज्ञ मोहम्मद इकबाल ने बताया। "इन संपत्तियों का उपयोग केवल समाज कल्याण और धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जाता है।"

    भारत में वक्फ कानून का इतिहास(Waqf Amendment Bill 2025)-

    भारत में वक्फ कानून की जड़ें औपनिवेशिक काल से पहले की हैं, जब इस्लामी शासक धार्मिक और परोपकारी उद्देश्यों के लिए संपत्तियां समर्पित करते थे। भारतीय उपमहाद्वीप में पहला दस्तावेजी वक्फ 12वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद गौरी के काल में, विशेष रूप से पृथ्वीराज चौहान पर उनकी विजय के बाद स्थापित किया गया था।

    स्वतंत्रता के बाद, 1954 में वक्फ अधिनियम स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य पूरे देश में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, निरीक्षण और प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करना था। 1955 में, इस अधिनियम को संशोधित किया गया और वक्फ संपत्तियों, राज्य वक्फ बोर्डों की स्थापना और केंद्रीय वक्फ परिषद के गठन से संबंधित प्रमुख प्रावधानों की रूपरेखा तैयार की गई। "1955 के अधिनियम के तहत, प्रत्येक राज्य को वक्फ संपत्तियों की पहचान करने और उन्हें रेखांकित करने के लिए एक सर्वेक्षण आयुक्त नियुक्त करना अनिवार्य था, जिन्हें फिर आधिकारिक राजपत्रों में दर्ज किया जाता है," वक्फ बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया।

    वक्फ के प्रकार-

    इस अधिनियम के अनुसार वक्फ को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:-

    वक्फ बाय यूजर्स - जैसे कब्रिस्तान, मुसाफिर खाने (सराय) और चौल्ट्रीज।

    मशरुतुल-खिदमत (सर्विस इनाम) के तहत वक्फ - जैसे काजी सेवा, निरखी सेवा, पेश इमाम सेवा और खतीब सेवा।

    वक्फ अलाल-औलाद - जिसे दाता (वाकिफ) द्वारा अपने रिश्तेदारों के लाभ के लिए और मुस्लिम कानून द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य धार्मिक या परोपकारी उद्देश्य के लिए समर्पित किया जाता है।

    वर्तमान स्थिति और विवाद-

    2005 तक, भारत में लगभग 5 लाख वक्फ संपत्तियां पंजीकृत थीं। हालांकि, द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, 2025 तक यह संख्या बढ़कर 8.72 लाख संपत्तियों तक पहुंच गई है। "वक्फ संपत्तियों की संख्या में यह वृद्धि कई विवादों का कारण बनी है, क्योंकि कई मामलों में निजी संपत्तियों को भी वक्फ बोर्ड द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में लिया जा रहा है," एक विधि विशेषज्ञ ने कहा।

    नए विधेयक में क्या है विवादित-

    नए संशोधन विधेयक में कई ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें लेकर विवाद गहरा गया है। इनमें वक्फ बोर्डों की संरचना में बदलाव, वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण की प्रक्रिया में परिवर्तन, और राज्य सरकार की भूमिका में वृद्धि शामिल है। "यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की स्वायत्तता पर हमला है," विपक्षी दल के एक नेता ने कहा। "इससे हमारे धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा।"

    दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को रोकना है। "हमारा उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है, ताकि इनका लाभ समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचे," सरकारी पक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया।

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    आगे क्या होगा-

    अब विधेयक राज्यसभा में विचार के लिए भेजा गया है, जहां इस पर गहन बहस होने की संभावना है। विपक्षी दलों ने इसे रोकने के लिए अपनी ताकत झोंकने का संकल्प लिया है, जबकि सरकार इसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश करेगी। "राज्यसभा में हमारी रणनीति स्पष्ट है - इस विधेयक के हर विवादास्पद प्रावधान पर बहस करना और मतविभाजन की मांग करना," विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा।

    देखना यह होगा कि राज्यसभा में इस विधेयक का क्या होता है और क्या सरकार इसे बिना किसी संशोधन के पारित करा पाती है या फिर विपक्ष के दबाव में कुछ बदलाव करने पड़ते हैं, जो भी हो, वक्फ संशोधन विधेयक 2025 निश्चित रूप से आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति और कानूनी परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।

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