Waqf Bill: संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 की बहस के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए वायनाड सांसद प्रियंका गांधी की मलयालम अखबार 'सुप्रभातम' ने अपने संपादकीय में कड़ी आलोचना की है। केरल के प्रमुख मुस्लिम संगठन समस्त केरल जेम-इयथुल उलमा द्वारा संचालित इस अखबार ने शुक्रवार को प्रकाशित अपने संपादकीय में संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित होने और कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई है।
Waqf Bill संपादकीय में लिखा-
संपादकीय में लिखा गया है, "वायनाड सांसद प्रियंका गांधी, जिनसे देश को बड़ी उम्मीदें हैं, पार्टी के व्हिप के बावजूद संसद नहीं आईं। यह एक धब्बा रहेगा। यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि जब विधेयक पर बहस हो रही थी, तब वे कहां थीं।" वायनाड क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं और क्षेत्रीय मुस्लिम पार्टियों जैसे IUML ने पहले प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के लिए प्रचार किया था ताकि वे सीट जीत सकें। अखबार ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी सवाल उठाया कि उन्होंने बिल के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई। "इसके अलावा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की एकता को चकनाचूर करने वाले इस विधेयक पर क्यों नहीं बोला, यह भी सवाल बना रहेगा," उन्होंने लिखा।
Through its editorial, Suprabhatham, the mouthpiece of the influential Muslim social organisation Samastha Kerala Jamiyyathul Ulama, has in particular questioned Priyanka Gandhi’s absence. Where was Priyanka when the BJP bulldozed Muslim rights? - was its editorial heading as the… pic.twitter.com/vQdLYshPqC
— The Pamphlet (@Pamphlet_in) April 4, 2025
Waqf Bill पर अखबार का रुख-
हालांकि अखबार ने वक्फ (संशोधन विधेयक) पारित होने पर निराशा व्यक्त की, लेकिन उन्होंने शेष विपक्षी नेताओं को इस कानून के खिलाफ मतदान करने के लिए धन्यवाद दिया। संपादकीय में लिखा गया है, "वक्फ विधेयक बाबरी घटना के बाद संघ परिवार की ओर से मुसलमानों और देश के धर्मनिरपेक्षता पर सबसे बड़ा हमला है। उन विपक्षी नेताओं को धन्यवाद जिन्होंने आधी रात के बाद भी संसद में बिल के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी और इसके खिलाफ मतदान किया। कांग्रेस और DMK के सदस्यों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।"
मुस्लिम समुदाय में बढ़ता असंतोष-
वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय में गहरा असंतोष है। समुदाय के नेताओं का मानना है कि यह विधेयक उनके धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला है। विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध करने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति ने समर्थकों को निराश किया है। केरल में मुस्लिम समुदाय के बीच प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर वायनाड जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में।
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 के मुख्य बिंदु-
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 वक्फ बोर्डों के कामकाज में कई बदलाव प्रस्तावित करता है। विधेयक के समर्थकों का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन होगा। हालांकि, विरोधियों का कहना है कि यह मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया-
इस मामले पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पार्टी के भीतर से ही कुछ नेताओं ने गुमनाम रहकर कहा है कि प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति एक व्यक्तिगत मामला था और इसे राजनीतिक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है।
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विपक्षी एकता पर सवाल-
इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगर विपक्ष सरकार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ना चाहता है, तो ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी नेताओं की उपस्थिति आवश्यक है। "जब देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना दांव पर हो, तब प्रमुख नेताओं का संसद में न होना गंभीर चिंता का विषय है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन मुस्लिम संगठनों का विरोध जारी है। कई संगठनों ने इस कानून के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। इस बीच, राजनीतिक दलों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपना रुख स्पष्ट करें और आगे की रणनीति बताएं। मलयालम अखबार की यह आलोचना एक संकेत है कि अल्पसंख्यक समुदाय अपने प्रतिनिधियों से बेहतर जवाबदेही की मांग कर रहा है, खासकर ऐसे मुद्दों पर जो उनके धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े हैं।
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