India’s Most Polluted City: उत्तर भारत के राज्यों में नवंबर महीने के दौरान वायु प्रदूषण में तेज उछाल देखा गया। एनसीआर के 29 में से 20 शहरों में पिछले साल की तुलना में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद पिछले महीने देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां पीएम 2.5 का स्तर 224 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
स्थानीय उत्सर्जन है असली कारण-
रिपोर्ट में कहा गया है कि पराली जलाने में कमी के बावजूद एनसीआर शहरों में प्रदूषण का स्तर देश में सबसे खराब रहा, जो स्थानीय उत्सर्जन की भूमिका को दर्शाता है। पूरे नवंबर में दिल्ली देश के सबसे प्रदूषित शहरों में चौथे स्थान पर रही। राजधानी में औसत पीएम 2.5 सांद्रता लगभग दोगुनी हो गई, जो अक्टूबर में 107 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर नवंबर में 215 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई। शहर में 23 दिन बेहद खराब, छह दिन गंभीर और एक दिन खराब रहा, जबकि एक भी दिन सुरक्षित राष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं कर सका।
पराली का योगदान घटा, फिर भी बढ़ा प्रदूषण-
दिलचस्प बात यह है, कि इस साल पराली जलाने का योगदान काफी कम रहा। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में दिल्ली के पीएम 2.5 में पराली जलाने का औसत योगदान लगभग 7 प्रतिशत था, जबकि पिछले साल यह 20 प्रतिशत था। इसके बावजूद 29 में से 20 एनसीआर शहरों में प्रदूषण पिछले साल से अधिक रहा। सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मुख्य कारण साल भर चलने वाले स्रोत हैं जैसे परिवहन, उद्योग, बिजली संयंत्र और अन्य दहन स्रोत। क्षेत्र-विशिष्ट उत्सर्जन में कटौती के बिना शहर मानकों का उल्लंघन करते रहेंगे।”
एनसीआर शहरों की स्थिति चिंताजनक-
गाजियाबाद के अलावा नोएडा, बहादुरगढ़, दिल्ली, हापुड़, ग्रेटर नोएडा, बागपत, सोनीपत, मेरठ और रोहतक भी भारत के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। उत्तर प्रदेश से छह, हरियाणा से तीन और दिल्ली इस सूची में थे। बहादुरगढ़ को छोड़कर शीर्ष 10 शहरों में से किसी ने भी एक दिन भी सुरक्षित दैनिक मानक के भीतर नहीं रहा। चरखी दादरी, बुलंदशहर, जींद, मुजफ्फरनगर, गुड़गांव, खुर्जा, भिवानी, करनाल, यमुनानगर और फरीदाबाद जैसे कई अन्य शहरों ने भी नवंबर के हर दिन मानक से अधिक पीएम 2.5 स्तर दर्ज किया।
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राष्ट्रीय स्तर पर भी गिरी वायु गुणवत्ता-
राष्ट्रीय स्तर पर भी वायु गुणवत्ता में तेज गिरावट देखी गई। 255 शहरों में से 114 शहरों ने भारत के दैनिक पीएम 2.5 मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर को पार कर लिया। केवल दो शहर मेघालय का शिलांग और सिक्किम का गंगटोक ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दैनिक दिशानिर्देश का पालन कर सके। राजस्थान में 34 में से 23 शहर, हरियाणा में 25 में से 22 शहर और उत्तर प्रदेश में 20 में से 14 शहर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहे।
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