Supriya Sule
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    Supriya Sule: आज के दौर में मालिक और कर्मचारी के बीच का रिश्ता सिर्फ दफ्तर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। छुट्टियों में भी दफ्तर के फोन और ईमेल कर्मचारियों का पीछा नहीं छोड़ते। लेकिन अब शायद यह स्थिति बदल सकती है। शुक्रवार को राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में एक विधेयक पेश किया, जो कर्मचारियों को काम के घंटों के बाद दफ्तरी फोन और ईमेल का जवाब न देने का अधिकार देता है।

    पहली बार नहीं, दूसरी कोशिश है यह-

    यह पहली बार नहीं है जब सुले ने यह विधेयक पेश किया है। 2019 में भी उन्होंने इसी तरह का प्रयास किया था। इस बार कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी समान विषय पर व्यावसायिक सुरक्षा संहिता संशोधन विधेयक 2025 पेश किया है। थरूर का विधेयक काम के घंटे सीमित करने, काम से अलग होने के अधिकार और मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था स्थापित करने की मांग करता है।

    क्यों जरूरी है यह कानून?

    बारामती सांसद के विधेयक में विश्व आर्थिक मंच की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब कर्मचारी से 24 घंटे उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है, तो उनमें नींद की कमी, तनाव और भावनात्मक थकावट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। लगातार ईमेल चेक करने की आदत कर्मचारियों के काम और निजी जीवन के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देती है। एक अध्ययन के अनुसार, काम से जुड़े संदेशों की लगातार निगरानी से दिमाग पर अत्यधिक बोझ पड़ता है।

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    विधेयक की प्रमुख मांगें-

    विधेयक के तहत 10 से अधिक कर्मचारियों वाली हर कंपनी को कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण के साथ बातचीत करनी होगी। यह प्राधिकरण तय करेगी कि काम के घंटों के बाद काम करने पर अतिरिक्त वेतन दिया जाए। सरकार को डिजिटल विषमुक्ति केंद्र स्थापित करने होंगे और परामर्श सेवाएं देनी होंगी। अगर कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे कर्मचारियों की कुल आय का 1 प्रतिशत जुर्माना देना होगा। कर्मचारी को काम के घंटों के बाद कॉल या ईमेल का जवाब न देने पर किसी भी तरह की सजा नहीं दी जा सकेगी।

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    हालांकि निजी सदस्य विधेयक को पास कराना बेहद मुश्किल होता है। अब तक सिर्फ 14 विधेयक ही कानून बन पाए हैं, जिनमें आखिरी 1970 में पास हुआ था।

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।