Gaya Gold Smuggling Case
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    Gaya Gold Smuggling Case: हावड़ा-जोधपुर-बीकानेर एक्सप्रेस में 21 नवंबर को हुई 1.44 करोड़ रुपये के सोने की लूट का मामला अब एक बड़ी साजिश के रूप में सामने आया है। इस केस में गया के GRP थाने के SHO राजेश कुमार सिंह समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच से पता चला है, कि यह कोई आम लूट का मामला नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित अपराध था।

    ट्रेन में कैसे हुई वारदात-

    कोलकाता के सोना व्यापारी मनोज सोनी के कर्मचारी धनंजय श्वेत 20 नवंबर की रात को जयपुर के एक ट्रेडर को 1.44 करोड़ रुपये की गोल्ड बिस्किट डिलीवर करने के लिए हावड़ा-जोधपुर-बीकानेर एक्सप्रेस में सवार हुए थे। जब ट्रेन गया पहुंची, तो पुलिस की वर्दी में चार लोग थर्ड एसी कोच में चढ़े और श्वेत के पास बैठ गए।

    कोडरमा और गया के बीच कहीं इन फर्जी पुलिसकर्मियों ने ट्रेन की चेन खींची और श्वेत को अपने साथ उतार लिया। ऑटोरिक्शा और बोलेरो जीप से सफर करते हुए, वह सभी गया के मानपुर स्थित एक वॉटर बॉटलिंग प्लांट पर पहुंचे। वहां पहले से एक सुनार मौजूद था, जिसने सोने को तोड़कर टुकड़े कर दिए।

    मामले में नया ट्विस्ट-

    शुरुआती दिनों में जांच धीमी गति से चल रही थी और फोकस सिर्फ उन चार फर्जी पुलिसकर्मियों पर था। लेकिन जब मनोज सोनी को अपने ही कर्मचारी पर शक हुआ, तो उन्होंने सीनियर अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। एक हफ्ते बाद सोनी ने पटना के रेलवे एसपी के पास अतिरिक्त शिकायत दर्ज कराई और खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा से भी संपर्क किया।

    इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए, एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया। SIT की डिटेल जांच में टेक्निकल एविडेंस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और अन्य सबूतों का विश्लेषण किया गया।

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    इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ही निकला मास्टरमाइंड-

    बुधवार को जब केस की इन्वेस्टिगेशन कर रहे SHO राजेश कुमार सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया गया, तो आठ घंटे की लंबी जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में चार सस्पेंडेड कांस्टेबल करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन के नाम भी सामने आए हैं। इसके अलावा दो सिविलियन भी इस साजिश में शामिल बताए जा रहे हैं।

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    अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, कि धनंजय श्वेत की इस पूरी साजिश में क्या भूमिका थी और कौन-कौन से अन्य लोग इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। पुलिस की आगे की जांच से और खुलासे होने की संभावना है।

    By sumit

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