Menaka Guruswamy: ममता बनर्जी की पार्टी ने बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार और कोएल मलिक के साथ Menaka Guruswamy को भी राज्यसभा का टिकट दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 16 मार्च को मतदान होना है और पश्चिम बंगाल में त्रिन्मूल की मज़बूत पकड़ को देखते हुए, Menaka का जीतना लगभग तय माना जा रहा है और अगर वह जीतती हैं, तो इतिहास बन जाएगा, क्योंकि वे देश की पहली खुलकर अपनी पहचान ज़ाहिर करने वाली LGBTQ+ सांसद होंगी।
धारा 377 हटवाने वाली वकील-
Menaka Guruswamy सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील हैं, लेकिन देश उन्हें सबसे ज़्यादा 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले की वजह से जानता है, जब सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को हटाकर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था। Menaka उन वकीलों में से एक थीं, जिन्होंने इस लड़ाई में याचिकाकर्ताओं की पैरवी की और देश को एक नई सोच की तरफ ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
Oxford से पढ़ाई, Harvard से डिग्री-
Menaka ने 1997 में वकालत शुरू की और तत्कालीन महान्यायवादी Ashok Desai के साथ काम किया। वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं और Harvard लॉ स्कूल से भी डिग्री हासिल की है। उनकी काबिलियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि 2019 में TIME पत्रिका ने उन्हें दुनिया के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया और यह सम्मान उन्हें उनकी साथी वकील Arundhati Katju के साथ मिला, जो उनकी जीवन साथी भी हैं।
परिवार और राजनीतिक पृष्ठभूमि-
Menaka के पिता मोहन गुरुस्वामि एक जाने-माने नीति विशेषज्ञ हैं, जो कभी भाजपा के करीबी रहे और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री Yashwant Sinha के विशेष सलाहकार भी रहे। बाद में उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया। यानी Menaka की जड़ें राजनीति और कानून दोनों में गहरी हैं।
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देश के लिए गर्व का पल-
NCP (शरद पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता Anish Gawande ने इस नामांकन पर लिखा, कि Menaka का संसद तक पहुंचना किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने माना, कि इससे LGBTQ+ समुदाय की सभी मुश्किलें रातोरात खत्म नहीं होंगी, लेकिन यह पल पूरे समुदाय के लिए अपार गर्व का है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में त्रिन्मूल की भारी बहुमत को देखते हुए Menaka की जीत लगभग तय मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ममला बनर्जी का यह दांव सियासी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर बड़ा संदेश देता है।
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