Yamuna Cleaning AI Machine: यमुना नदी की सफाई की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। जल शक्ति मंत्रालय की पहल के तहत पहली बार AI-सक्षम मशीनों का इस्तेमाल यमुना में तैरते कचरे, प्लास्टिक और जलीय खरपतवार को हटाने के लिए किया गया। Potential Engineering के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपम शेठ ने बताया, कि उनकी कंपनी ने यमुना नदी के 42 किलोमीटर के दायरे में सफलतापूर्वक सफाई अभियान पूरा किया है और यह सब सिर्फ 45 दिनों में संभव हुआ।
पहली बार AI ने संभाली Yamuna की सफाई की कमान-
सामाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, दीपम शेठ ने बताया, कि यह पहला मौका है, जब AI-सक्षम मशीनों के ज़रिए यमुना की सतह पर जमे ठोस कचरे, प्लास्टिक और जैविक पदार्थ को हटाया गया है और नतीजे बहुत अच्छा रहे हैं। उन्होंने कहा, कि यमुना में तैरता कचरा और हानिकारक जलीय पौधे नदी के बहाव और स्वरूप दोनों को नुकसान पहुंचा रहे थे। AI ने इस मुश्किल काम को न केवल आसान बनाया, बल्कि पहले से कहीं अधिक प्रभावी तरीके से अंजाम दिया। उन्होंने कहा, “यह परियोजना तकनीक की उस ताकत को दर्शाती है, जो पर्यावरण बहाली को नई गति दे सकती है।”
कौन-सी तकनीकें हुईं तैनात?
इस अभियान में कई आधुनिक तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल किया गया। स्वदेशी रूप से विकसित ‘मानवरहित रोबोटिक ट्रैश स्किमर’ मशीनों ने नदी की सतह से तैरता कचरा, प्लास्टिक और जैविक पदार्थ हटाया। इनके साथ-साथ ‘मशीनी खरपतवार कटाई यंत्रों’ ने बड़े पैमाने पर तैरती खरपतवार को साफ किया।
ड्रोन और AI आधारित प्रदूषण मानचित्रण से नदी के प्रदूषण वाले क्षेत्रों की पहचान की गई, कचरे का वर्गीकरण हुआ और उसकी मात्रा का अनुमान लगाया गया। एक विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से पूरे काम की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की गई।
नतीजे बोलते हैं नदी की सेहत में आया सुधार-
शेठ ने बताया, कि इस परियोजना ने नदी की सतह की गुणवत्ता में सुधार किया, पारिस्थितिक दबाव कम किया और एक ऐसा तकनीकी मॉडल तैयार किया, जिसे पूरे देश में दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा, कि डेटा पर आधारित पर्यावरण प्रबंधन ने काम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की। यह मॉडल भविष्य में देश की अन्य नदियों की सफाई के लिए भी एक मार्गदर्शक उदाहरण बन सकता है।
यमुना पर फोकस-
जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा, कि मंत्रालय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के मार्गदर्शन में यमुना सफाई के काम में जुटा है। मंत्रालय ने यमुना में कचरा फेंकने से रोकने के लिए 150 सेवानिवृत्त कर्मियों को तैनात किया है। दिल्ली और हरियाणा सरकारें भी जल निकासी व्यवस्था सुधारने में सहयोग कर रही हैं।
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी यमुना सफाई को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया है। मोदी सरकार गुजरात की साबरमती नदी की तर्ज पर यमुना के किनारे एक भव्य रिवरफ्रंट बनाने की दिशा में भी काम कर रही हैं यानी यमुना को सिर्फ साफ नहीं, बल्कि सुंदर भी बनाने का सपना देखा जा रहा है।
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