Newborn Baby Sale Case
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    Illegal Child Sales Network: हैदराबाद की डॉक्टर पचिपाला नम्रथा का नाम इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और वजह है, एक ऐसा काला कारोबार, जो एक दशक से भी ज़्यादा समय तक बेरोक-टोक चलता रहा। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने इस मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, विशाखापट्टनम, हैदराबाद और विजयवाड़ा में 50 प्रॉपर्टीज़ को प्रोविज़नल अटैच किया है।

    जिनकी कुल कीमत करीब 29.7 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह पूरा मामला अवैध सरोगेसी और नवजात बच्चों की बिक्री से जुड़े एक सुनियोजित फाइनेंशियल नेटवर्क का है, जिसे जानबूझकर इतनी चालाकी से डिज़ाइन किया गया था कि यह वैध मेडिकल और सरोगेसी खर्च जैसा दिखे।

    दस साल, तीन फेज़ और करोड़ों का हिसाब-

    ईडी की जांच के मुताबिक, यह रैकेट 2014 से जुलाई 2025 तक विशाखापट्टनम के एक क्लीनिक में चलता रहा। जांच एजेंसी ने इसे तीन फेज़ में बांटा है। 2014 से 2018 के बीच करीब 72 डिलीवरी हुईं, हर केस में औसतन 10 लाख रुपये लिए गए, कुल मिलाकर 7.2 करोड़ रुपये।

    2019 से 2023 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 110 डिलीवरी तक पहुंच गया और औसत रकम 14 लाख हो गई, यानी कुल 15.4 करोड़। और 2024-25 में 31 डिलीवरी में प्रति केस औसतन 23 लाख रुपये वसूले गए, जो कुल 7.1 करोड़ बनते हैं। इसके अलावा आईवीएफ ट्रीटमेंट के नाम पर ठगे गए पीड़ितों से वसूली गई रकम को भी इस क्राइम प्रोसीड्स में शामिल किया गया है।

    40 करोड़ का कैश-

    ईडी ने नम्रथा, उनके रिश्तेदारों और उनसे जुड़े अस्पतालों के बैंक अकाउंट्स की बारीकी से जांच की। पाया गया, कि 2014 से 2025 के बीच इन अकाउंट्स में करीब 40 करोड़ रुपये कैश डिपॉज़िट किए गए और लगभग 20 करोड़ रुपये कैश में निकाले गए। जांचकर्ताओं का मानना है, कि यह पैसा एजेंट्स को देने और कमज़ोर परिवारों से नवजात बच्चे खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पैसे की मूवमेंट तीन लेयर में होती थी।

    पहले निसंतान दंपतियों से 20 से 30 लाख रुपये प्रति बच्चा वसूला जाता था, फिर लीड एजेंट्स जैसे धनश्री संतोषी को फंड ट्रांसफर होता था और तीसरी लेयर पर सीधे बायोलॉजिकल पेरेंट्स तक पैसा पहुंचता था, बेटी के लिए करीब 3.5 लाख और बेटे के लिए 4.5 लाख रुपये। सब-एजेंट्स और कूरियर को प्रति केस लगभग 50,000 रुपये कमीशन मिलता था।

    विला से लेकर खेत तक-

    नम्रथा ने ईडी को बताया, कि उनकी आय कंसल्टेंसी, किराया और खेती से होती है, लेकिन एजेंसी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई, खासतौर पर तब जब उनका मेडिकल लाइसेंस सस्पेंड था।

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    अटैच की गई प्रॉपर्टीज़ में सिकंदराबाद का यूनिवर्सल सृष्टि हॉस्पिटल बिल्डिंग, विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम में हॉस्पिटल बिल्डिंग्स, बछुपल्ली में कई फ्लैट्स, कोंडापुर के पाम रिज विलास में नम्रथा का खुद का विला, गुंटूर ज़िले के बालेमारु गांव में 15 से ज़्यादा कृषि भूमि के टुकड़े और अमरावती, विजयवाड़ा व हैदराबाद के कई इलाकों में खाली प्लॉट शामिल हैं। ईडी का कहना है, कि यह पूरा नेटवर्क यह साबित करता है, कि कैसे अवैध कमाई को दशकों तक संपत्तियों में बदला जाता रहा।

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    By sumit

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