GRAP 3
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    GRAP 3: राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। सांस लेना दूभर हो गया है और लोगों की सेहत पर इसका बुरा असर साफ दिखाई दे रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स तो यहां तक कह रहे हैं, कि अगर मुमकिन हो, तो कुछ दिनों के लिए दिल्ली छोड़ दें या घर में रहकर खुद को जहरीली हवा से बचाएं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने दिल्ली-NCR में Graded Response Action Plan (GRAP) के और सख्त नियम लागू करने का फैसला लिया है।

    इस नए फैसले के तहत अब सरकारी, प्राइवेट और म्युनिसिपल ऑफिसों में सिर्फ पचास फीसदी स्टाफ ही ऑफिस आ सकेगा, जबकि बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का निर्देश दिया जाएगा। केंद्र सरकार भी दिल्ली-NCR में तैनात अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की इजाजत देने पर विचार कर रही है। यह कदम सड़कों पर भीड़ कम करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाया जा रहा है।

    क्या बदलाव हुआ है GRAP में-

    दिलचस्प बात यह है कि पहले यह नियम GRAP के सबसे ऊंचे स्तर यानी Stage IV (Emergency Level) में लागू होते थे, जब AQI 450 से ऊपर चला जाता था। लेकिन अब इन्हें Stage III में ही लागू कर दिया गया है। यानी जब दिल्ली का AQI 401 से 450 के बीच पहुंचता है, तब ही ये सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल दिल्ली-NCR में GRAP Stage 3 लागू है, जिसका मतलब है कि हवा की क्वालिटी ‘गंभीर’ श्रेणी में आ चुकी है।

    GRAP Stage III के तहत अब NCR की राज्य सरकारें और दिल्ली सरकार यह फैसला ले सकती हैं कि पब्लिक, म्युनिसिपल और प्राइवेट ऑफिसों में केवल पचास प्रतिशत ताकत के साथ काम हो और बाकी कर्मचारी घर से काम करें। इसी तरह केंद्र सरकार भी अपने दफ्तरों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था कर सकती है। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर गाड़ियों की संख्या घटाना और ट्रैफिक से होने वाले प्रदूषण को कंट्रोल में लाना है।

    क्यों जरूरी है GRAP और क्यों हो रहा है अपडेट-

    GRAP दरअसल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एक इमरजेंसी योजना है जो खराब वायु गुणवत्ता से निपटने के लिए बनाई गई है। जब दिल्ली का दैनिक औसत AQI एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाता है, तब यह प्लान एक्टिवेट हो जाता है और कई अधिकारियों को मिलकर एक्शन लेना होता है। यह एक तरह का चरणबद्ध जवाब है जो प्रदूषण की गंभीरता के हिसाब से अलग-अलग कदम उठाने का निर्देश देता है।

    अधिकारियों का कहना है कि यह नए बदलाव वैज्ञानिक डेटा, मौसम के पूर्वानुमान और जमीनी स्तर पर काम करने वाली एजेंसियों के फीडबैक की समीक्षा के बाद किए गए हैं। हाल के सालों में सर्दियों के दौरान स्मॉग की समस्या और भी गंभीर होती जा रही है। इसलिए आयोग ने कई सख्त उपायों को पहले के चरणों में ही शामिल कर दिया है ताकि वायु प्रदूषण को और बिगड़ने से रोका जा सके।

    आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला-

    यह फैसला दिल्ली-NCR में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक राहत भरा कदम साबित हो सकता है। जब सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम होगी तो न सिर्फ प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या भी कुछ हद तक सुलझ सकती है। वर्क फ्रॉम होम से कर्मचारियों को भी जहरीली हवा में बाहर निकलने की मजबूरी नहीं रहेगी और वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित घरों में रह सकेंगे।

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    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ये उपाय काफी नहीं हैं। प्रदूषण से निपटने के लिए लंबी अवधि की योजनाओं और सभी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। पराली जलाना, कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाली धूल, इंडस्ट्रियल एमिशन और वाहनों का बढ़ता प्रयोग – ये सभी मिलकर दिल्ली की हवा को जहरीला बना रहे हैं। ऐसे में हर नागरिक को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहना होगा।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।