Delhi-Mumbai Expressway: भारत के सबसे व्यस्त एक्सप्रेसवे में से एक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अब एक ऐसी सुविधा शुरू हो गई है जो न सिर्फ सड़क हादसों के शिकार लोगों की जान बचाएगी, बल्कि इस क्षेत्र में पर्यटन को भी नई ऊंचाइयां देगी। यह हेलीकॉप्टर एयरलिफ्ट सर्विस रोड एक्सीडेंट के पीड़ितों को गोल्डन आवर के भीतर इलाज दिलाने में मददगार साबित होगी। अब यात्रियों को लंबे ट्रैफिक जाम में फंसने की चिंता नहीं करनी होगी, क्योंकि यह आधुनिक हवाई सेवा उन्हें समय पर मदद पहुंचा सकती है।
राजस्थान के पिनान में बना पहला हेलीपैड-
यह सेवा राजस्थान के अलवर जिले में पिनान रेस्ट एरिया के पास बने एक हेलीपैड से शुरू की गई है, जो एक्सप्रेसवे के एक सौ पच्चीस किलोमीटर के स्ट्रेच पर स्थित है। इस हेलीकॉप्टर सर्विस का मुख्य मकसद सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए लोगों को तुरंत मेडिकल सहायता देना है। आमतौर पर एक्सप्रेसवे पर एंबुलेंस को एक्सीडेंट स्पॉट तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है, लेकिन यह हेलीकॉप्टर घायल व्यक्ति को तुरंत उठाकर गोल्डन आवर के भीतर हॉस्पिटल पहुंचा सकता है, जो इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
सेवा संचालित करने वाली कंपनी के अनुसार, यह नई सुविधा दुर्घटनाओं के दौरान कीमती समय बचाएगी और कई जिंदगियां बचाने में मदद करेगी। यह एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए एक सुरक्षित, तेज और आधुनिक ट्रांसपोर्ट विकल्प प्रदान करती है।
पर्यटन को बढ़ावा देने की भी है योजना-
इस सेवा का दूसरा चरण जल्द ही राजस्थान पर्यटन विभाग के सहयोग से शुरू होगा और इसका मुख्य उद्देश्य टूरिज्म को बढ़ावा देना होगा। इस फेज में यात्रियों को हेलीकॉप्टर जॉय राइड्स और एरियल टूर की सुविधा दी जाएगी। पर्यटक आसमान से सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य, अरावली पर्वत श्रृंखला और क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के लुभावने दृश्यों का आनंद ले सकेंगे। इस कदम से राजस्थान में हेलीकॉप्टर टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और स्थानीय पर्यटन उद्योग के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पिनान रेस्ट एरिया में बना हेलीपैड अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरा करता है। यह एक साथ आठ हेलीकॉप्टरों को पार्क कर सकता है। रात के समय संचालन के लिए हेलीपैड में हाई-इंटेंसिटी लाइट्स और पायलटों के लिए एक एडवांस्ड नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है। यात्रियों के लिए एक वेटिंग लाउंज और आपात स्थिति के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
हेलीकॉप्टर सेवा की जरूरत क्यों पड़ी-
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत के सबसे व्यस्त और सबसे तेज राजमार्गों में से एक है। हर दिन हजारों वाहन बहुत तेज रफ्तार से यात्रा करते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है। किसी भी रोड एक्सीडेंट में पहले घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। अगर किसी घायल व्यक्ति को इस दौरान जल्दी और सही इलाज मिल जाए, तो उसके बचने की संभावना बहुत अधिक होती है। लेकिन इतने लंबे और हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर एंबुलेंस को अक्सर एक्सीडेंट स्पॉट तक पहुंचने में समय लग जाता है। भारी ट्रैफिक, लंबी दूरी, या अवरुद्ध रास्ते उन्हें देरी करा सकते हैं। इस वजह से कई घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
हेलीकॉप्टर सेवा इस समस्या को हल करने में मदद करती है। यह दुर्घटना स्थल पर जल्दी पहुंच सकती है, घायल व्यक्ति को एयरलिफ्ट कर सकती है, और सीधे अस्पताल ले जा सकती है, जिससे कीमती मिनट बचते हैं और कई जानें बचाई जा सकती हैं।
आम लोगों के लिए क्या मायने रखती है यह सुविधा-
जो लोग अक्सर दिल्ली से मुंबई या इसके बीच के शहरों में यात्रा करते हैं, उनके लिए यह सुविधा एक बड़ी राहत है। सोचिए, अगर भगवान न करे कोई दुर्घटना हो जाए और आपको या आपके किसी प्रियजन को तुरंत अस्पताल पहुंचाना हो, तो यह हेलीकॉप्टर सेवा जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकती है। पहले ऐसी स्थितियों में परिवार वाले बेबस होकर सड़क पर एंबुलेंस का इंतजार करते थे, लेकिन अब हवाई रास्ते से मदद संभव है।
इसके अलावा जो परिवार छुट्टियां मनाने या घूमने के लिए इस रूट पर यात्रा करते हैं, वे भी अब हेलीकॉप्टर जॉय राइड्स का मजा ले सकते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए यह एक यादगार अनुभव होगा। राजस्थान के खूबसूरत परिदृश्य को आसमान से देखने का रोमांच अलग ही है। सरिस्का के जंगली जानवरों को ऊपर से देखना, अरावली की पहाड़ियों की खूबसूरती को महसूस करना और ऐतिहासिक स्मारकों की भव्यता को हवा में उड़ते हुए निहारना, यह सब अब आसान हो गया है।
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भविष्य में और कहां-कहां मिलेगी यह सुविधा-
फिलहाल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ कुल आठ हेलीपैड की योजना है। सेवा सबसे पहले अलवर जिले के पिनान में शुरू की गई है और धीरे-धीरे इसे अन्य रेस्ट एरिया तक विस्तारित किया जाएगा। यह एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। जैसे-जैसे यह सेवा पूरे एक्सप्रेसवे पर फैलेगी, लाखों यात्रियों को इसका फायदा मिलेगा।
यह पहल न सिर्फ एक तकनीकी उन्नति है, बल्कि मानवीय संवेदना का भी प्रतीक है। सरकार और निजी कंपनियों का यह प्रयास दिखाता है कि हम अपने नागरिकों की जान की कितनी कद्र करते हैं। हर मिनट कीमती होता है और यह सेवा उन मिनटों को बचाने के लिए डिजाइन की गई है जो किसी की जिंदगी बचा सकते हैं।
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