Education News
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    Education News: महाराष्ट्र में हर साल स्कूल खुलने से पहले एक शिकायत आम हो जाती थी, स्कूलों द्वारा बच्चों के माता-पिता को तय दुकानों से ही यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। लेकिन अब इस पर लगाम लगाने के लिए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। नए सर्कुलर में साफ कहा गया है, कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान या वेंडर से खरीदारी करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

    पुराने नियम को फिर किया गया सख्ती से लागू-

    दरअसल, यह नियम नया नहीं है। 11 जून 2004 के एक सरकारी आदेश में पहले ही इस तरह की जबरदस्ती पर रोक लगाई जा चुकी थी। लेकिन अब शिक्षा विभाग ने इसे दोबारा सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है, कि इस बार नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

    नए सत्र से पहले बढ़ी सख्ती-

    जून में शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से ठीक पहले यह फैसला लिया गया है, क्योंकि यही वह समय होता है। जब अभिभावक बच्चों के लिए यूनिफॉर्म और किताबें खरीदते हैं। कई बार स्कूलों द्वारा तय दुकानों पर सामान महंगे दामों पर बेचा जाता था, जिससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ बढ़ता था। इस नए आदेश का मकसद इसी ‘profiteering’ को रोकना है।

    शिकायत के लिए बनेगा खास सिस्टम-

    अब अभिभावकों को शिकायत करने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि हर जिले में एक ग्रीवेंस रिड्रेसल मकैनिज़्म तैयार किया जाए। इसके तहत शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग ईमेल आईडी जारी की जाएगी और एक नोडल ऑफिसर भी नियुक्त किया जाएगा, जो इन शिकायतों को संभालेगा।

    सभी बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा नियम-

    यह आदेश केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य बोर्ड, CBSE, ICSE और सभी निजी व सहायता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। यानी अब कोई भी स्कूल इस नियम से बच नहीं सकता। साथ ही, स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल SCERT और NCERT द्वारा निर्धारित या बोर्ड द्वारा स्वीकृत किताबों का ही उपयोग करें।

    स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की भी होगी जिम्मेदारी-

    सर्कुलर के अनुसार, स्कूलों को अपनी School Management Committee में एक प्रस्ताव पास करना होगा, जिसमें यह पुष्टि की जाएगी कि वे किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं करेंगे। अगर किसी स्कूल के खिलाफ शिकायत मिलती है और जांच में वह सही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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    अभिभावकों में अब भी संशय-

    हालांकि इस फैसले से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कई लोग इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी भी संदेह में हैं। एक PTA सदस्य का कहना है, कि ऐसे नियम पहले भी बने हैं, लेकिन उन पर सही तरीके से अमल नहीं हुआ। अब देखना यह होगा, कि इस बार सरकार कितनी सख्ती से इन नियमों को लागू करती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।