Teacher Slaps Student Case: गांधीनगर की एक प्राइवेट स्कूल में हुई एक घटना ने पूरे गुजरात को हिला दिया है। एक टीचर ने क्लास 9 की छात्रा को इसलिए थप्पड़ मार दिया, क्योंकि उसने होमवर्क पूरा नहीं किया था। लेकिन यह कोई साधारण थप्पड़ नहीं था। इस एक थप्पड़ ने 14 साल की मासूम बच्ची का कान का पर्दा फाड़ दिया और उसकी सुनने की क्षमता हमेशा के लिए कम हो गई। अब पांच साल बाद कोर्ट ने टीचर परुलबेन को तीन साल तीन महीने की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है।
यह मामला 2020 का है, जब यह घटना घटी थी। तब से लेकर अब तक पीड़ित बच्ची के परिवार ने इंसाफ की लड़ाई लड़ी। आखिरकार कोर्ट का फैसला आया और यह साबित हो गया, कि क्लासरूम में हिंसा को अनुशासन का नाम देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्लासरूम में क्या हुआ था उस दिन-
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, गांधीनगर के सेक्टर 28 में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में साइंस टीचर परुलबेन ने क्लासरूम में गुस्सा खो दिया। उनकी क्लास की एक 14 साल की छात्रा ने अपना लेसन पूरा नहीं किया था। इस बात पर गुस्से में आकर टीचर ने बच्ची के बाएं गाल पर जोर से थप्पड़ मार दिया।
थप्पड़ इतना जोर का था, कि बच्ची का कान का पर्दा फट गया। डॉक्टरों ने बाद में कन्फर्म किया, कि उसकी सुनने की क्षमता पर परमानेंट असर पड़ा है। जो स्कूल में एक रूटीन डांट-फटकार के रूप में शुरू हुआ, वह बच्ची के लिए जिंदगी भर की शारीरिक और मानसिक तकलीफ बन गया।
माता-पिता ने चुप्पी तोड़ी-
हालांकि स्कूलों में बच्चों की पिटाई की खबरें आम हैं, लेकिन बहुत कम मामले कोर्ट तक पहुंचते हैं। इस केस में चोट की गंभीरता को देखते हुए बच्ची के माता-पिता ने चुप रहना मंजूर नहीं किया। जब उनकी बेटी को सुनने में दिक्कत होने लगी, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एक लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई, जो कई सालों तक चली। यह केस गांधीनगर की तीसरी एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुना गया।
मेडिकल सबूत और गवाहों की गवाही-
ट्रायल के दौरान प्रॉसिक्यूटर ने मेडिकल रिपोर्ट पेश की, जिसमें कान के पर्दे के फटने की पुष्टि की गई थी। साथ ही गवाहों के बयान और स्कूल से जुड़े सबूत भी पेश किए गए। कोर्ट ने पाया, कि टीचर ने अपने अधिकार का दुरुपयोग किया और छात्रों और माता-पिता के विश्वास को तोड़ा। कोर्ट ने साफ कहा, कि यह हमला ना तो गलती से हुआ था और ना ही यह कोई छोटी-मोटी बात थी, बल्कि यह एक नाबालिग के खिलाफ गंभीर आपराधिक कृत्य था।
सजा और भारी जुर्माना-
कोर्ट ने परुलबेन को भारतीय दंड संहिता के तहत तीन साल तीन महीने की साधारण कैद और 25 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया। इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत नाबालिग के साथ क्रूरता के लिए एक साल की साधारण कैद और 25 हजार रुपये का अलग से जुर्माना भी लगाया गया। कुल मिलाकर जुर्माना 50 हजार रुपये है।
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ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता-
कोर्ट ने अपने सख्त रिमार्क्स में कहा, “एक मासूम बच्चे पर टीचर द्वारा अपने अधिकार का दुरुपयोग करके की गई शारीरिक हिंसा बहुत गंभीर मामला है। ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में एक मजबूत संदेश भेजने की जरूरत है।”
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