India Nepal Trade: नई दिल्ली से सटे नेपाल के साथ दशकों से चले आ रहे सहज व्यापारिक रिश्तों में अब बदलाव की आहट साफ सुनाई दे रही है। नेपाल में नई सत्ता आने के बाद लिए गए ताजा फैसलों ने सीमा पार व्यापार पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में लिए गए, इस निर्णय ने भारतीय कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। अब 100 रुपये से अधिक कीमत वाले हर सामान पर सीमा शुल्क यानी ‘भंसार’ देना अनिवार्य कर दिया गया है।
छोटे व्यापारियों पर सबसे बड़ा असर-
नेपाल सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से छोटे कारोबारी नेपाल के ग्राहकों पर निर्भर रहे हैं। वे कम कीमत पर सामान बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते थे, लेकिन अब नए नियमों के चलते उनका बिजनेस सीधे प्रभावित हो रहा है। बिहार की करीब 378 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से जुड़ी है और यहां के बाजारों में अचानक सुस्ती देखी जा रही है।
लाखों का सामान जब्त, बढ़ी टेंशन-
नेपाल के कस्टम विभाग ने सख्ती दिखाते हुए सीमा पर कई जगहों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। भैरहवा और सोनौली बॉर्डर पर बीते 24 घंटे में करीब 15 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है। इस कदम से व्यापारियों में घबराहट का माहौल है। अचानक आई इस सख्ती से लोग समझ नहीं पा रहे, कि आगे कैसे काम किया जाए।
क्या है ‘भंसार’ और कितना लगेगा टैक्स-
नेपाल में सीमा शुल्क को ‘भंसार’ कहा जाता है। नए नियम के अनुसार, 100 रुपये से अधिक कीमत वाले सामान पर 5 से 80 फीसदी तक कस्टम ड्यूटी लगेगी, साथ ही 13 फीसदी का वैट भी देना होगा। यानी अब सामान की कीमत पहले से काफी ज्यादा हो जाएगी। इससे न सिर्फ व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी असर पड़ेगा।
नेपाल के लोगों पर भी पड़ेगा असर-
यह फैसला सिर्फ भारतीय व्यापारियों के लिए ही मुश्किल नहीं है, बल्कि नेपाल के उपभोक्ताओं के लिए भी महंगा साबित होगा। नेपाल के लोग रोजमर्रा की कई चीजें जैसे दवाएं, कपड़े, रेडीमेड गारमेंट, सीमेंट, कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रिकल सामान, खाने-पीने की चीजें और फल-सब्जियां भारत से खरीदते हैं। अब इन सभी चीजों पर ज्यादा टैक्स देना होगा, जिससे उनकी कीमतें बढ़ेंगी और आम लोगों का खर्च बढ़ेगा।
सीमा पर माइक से हो रहा ऐलान-
नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों ने इस फैसले को लागू करने के लिए सीमा क्षेत्रों में माइक से अनाउंसमेंट करना शुरू कर दिया है। यूपी और बिहार के बॉर्डर इलाकों में लोगों को साफ तौर पर बताया जा रहा है, कि 100 रुपये से ज्यादा का कोई भी सामान ले जाने पर टैक्स देना अनिवार्य है। इस नियम में किसी भी संस्था, यहां तक कि NGO को भी कोई छूट नहीं दी गई है।
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‘मेक इन नेपाल’ पर जोर, लेकिन सवाल भी-
विशेषज्ञों का मानना है, कि नेपाल सरकार का यह कदम अपने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। सरकार चाहती है, कि स्थानीय उद्योग मजबूत हों और आयात पर निर्भरता कम हो। हालांकि, इस फैसले से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अब देखना होगा, कि आने वाले समय में यह नीति कितनी कारगर साबित होती है।
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