Mango vs Tamarind Chutney: समोसे के साथ हरी चटनी हो या चाट के ऊपर इमली की मीठी चटनी बिना चटनी के खाना अधूरा-सा लगता है। लेकिन जिसे हम महज़ स्वाद के लिए थाली में रखते हैं, वह चुपचाप हमारे खून में शुगर का स्तर बढ़ा सकती है। आम चटनी और इमली चटनी दोनों भारतीय रसोई की पहचान हैं, लेकिन दोनों का शरीर पर असर एक जैसा नहीं होता। जो लोग अपना वज़न, ब्लड शुगर या मेटाबॉलिक सेहत देखते हैं, उनके लिए यह फ़र्क जानना बेहद ज़रूरी है।
ब्लड शुगर अचानक क्यों बढ़ती है?
एनडीटीवी के मुताबिक, जब हम कुछ मीठा या मैदे से बनी चीज़ खाते हैं, तो ग्लूकोज़ तेज़ी से खून में घुल जाता है और शरीर को एकदम से इंसुलिन बनाना पड़ता है। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार जिन चीज़ों में चीनी या मैदा ज़्यादा होता है, वे रेशेदार चीज़ों की तुलना में शुगर कहीं तेज़ी से बढ़ाती हैं। चटनी भले ही मात्रा में कम हो, लेकिन उसमें घुली चीनी यही काम करती है।
आम चटनी का ब्लड शुगर पर क्या असर होता है?
यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में छपे एक शोध के मुताबिक, ताज़ा आम में रेशा होता है, जो शुगर को धीरे-धीरे खून में घुलने देता है। ताज़ा आम खाने से शुगर का लेवल थोड़ा धीमे बढ़ता है। लेकिन बाज़ार में मिलने वाली आम चटनी बिल्कुल अलग चीज़ है। उसे बनाने में काफ़ी चीनी डाली जाती है और पकाने की वजह से फल का रेशा लगभग खत्म हो जाता है। हेल्थलाइन के पोषण आंकड़ों के मुताबिक, ऐसी चटनी ताज़े आम की तुलना में कहीं तेज़ी से शुगर बढ़ाती है, खासकर जब इसे समोसे या पकौड़े जैसी चीज़ों के साथ खाया जाए।
इमली चटनी खट्टी दिखती है, लेकिन चीनी से भरी है-
इमली का स्वाद खट्टा होता है, इसलिए उसे संतुलित करने के लिए चटनी में ढेर सारी चीनी मिलाई जाती है। पोषण विश्लेषण बताते हैं कि सिर्फ एक चम्मच मीठी इमली चटनी में बारह से पंद्रह ग्राम तक चीनी हो सकती है और वो भी लगभग सब की सब मिलाई हुई चीनी। ब्लू सर्कल डायबिटीज़ फाउंडेशन के अनुसार इमली चटनी का ग्लाइसेमिक लोड बहुत अधिक होता है क्योंकि इसमें रेशा न के बराबर होता है और चीनी खून में बहुत जल्दी घुल जाती है। इंसुलिन प्रतिरोध या मधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए यह तेज़ उछाल काफ़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में पोषण की प्रोफेसर जैनिस मारास के मुताबिक मिलाई हुई चीनी वाले खाद्य पदार्थ उन चीज़ों की तुलना में ब्लड शुगर कहीं तेज़ी से बढ़ाते हैं जिनमें चीनी रेशे के अंदर बंद होती है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की सलाह भी यही है कि बार-बार ज़्यादा चीनी खाने से शुगर का स्तर बार-बार उछलता है, जिससे लंबे समय में मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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तो फिर चटनी खाएं या नहीं?
चटनी से मुंह मोड़ने की ज़रूरत नहीं, बस होशियारी से खाएं। थोड़ी मात्रा में खाएं, दाल या दही जैसी रेशेदार और प्रोटीन वाली चीज़ों के साथ लें, और घर पर बनी चटनी को प्राथमिकता दें, जिसमें चीनी कम डाली हो। चटनी स्वाद बढ़ाने के लिए है, खाने का मुख्य हिस्सा बनाने के लिए नहीं। रोज़मर्रा की इन्हीं छोटी-छोटी समझदारियों से सेहत का बड़ा फ़र्क पड़ता है।
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