Newborn Baby Sale Case: गौतम बुद्ध नगर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। यहां एक निजी अस्पताल में सिर्फ पांच दिन की नवजात बच्ची को 2.6 लाख रुपये में बेचने का आरोप लगा है। इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और अस्पताल को सील कर दिया गया, साथ ही उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज में मौजूद काले सच को भी उजागर करता है।
अस्पताल मालिक समेत तीन गिरफ्तार-
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नवजीवन अस्पताल की मालिक याशिका गर्ग, एक सफाई कर्मचारी और एक ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस पूरे मामले में शामिल एक नर्स और उसका पति अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है, कि जल्द ही उन्हें भी पकड़ लिया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद इलाके में डर और गुस्से का माहौल है।
व्हाट्सऐप मैसेज से खुला पूरा राज-
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिसरख के ऐस सिटी में रहने वाले एक कपल को व्हाट्सऐप पर एक मैसेज मिला, जिसमें लिखा था, कि एक नवजात बच्ची “adoption के लिए available” है। पहले तो उन्हें यह सामान्य लगा, लेकिन जब संपर्क करने पर पैसों की मांग की गई, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने तुरंत चाइल्ड प्रोटेक्शन अथॉरिटीज को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
बताया जा रहा है, कि यह मैसेज एक नर्स द्वारा फैलाया गया था, जो अस्पताल में काम करने के साथ-साथ घरेलू मदद का काम भी करती थी। जब महिला ने संपर्क किया, तो उससे कहा गया, कि बच्ची को 2.6 लाख रुपये में दिया जा सकता है और जल्दी निर्णय लेने का दबाव भी बनाया गया।
जॉइंट ऑपरेशन में बच्ची को सुरक्षित बचाया गया-
सूचना मिलते ही एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और बिसरख पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने चतुराई से जाल बिछाया और बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया। फिलहाल बच्ची को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर साई कृपा शेल्टर होम भेज दिया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू-
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समिति अस्पताल के सभी रिकॉर्ड, खासकर डिलीवरी रजिस्टर की जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके, कि कहीं और भी इस तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच कोर्ट में अहम सबूत साबित हो सकती है।
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कानूनी कार्रवाई तेज-
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की मानव तस्करी से जुड़ी धाराओं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क को खंगालने की कोशिश की जा रही है।
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