Punjab Farmer Protest: पंजाब में किसान आंदोलन एक बार फिर तेज़ हो गया है। मंगलवार को तड़के 5 बजे पंजाब पुलिस ने अमृतसर के राम तीरथ रोड बाईपास पर धरना दे रहे, किसानों पर कार्रवाई की। किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर समेत करीब 70 किसानों को ज़बरदस्ती हटाकर हिरासत में ले लिया गया। किसान नेता गुरचरण सिंह छाबड़ा ने बताया, कि सोमवार रात से ही धरना स्थल के पास पुलिस की तैनाती बढ़ने लगी थी, जिससे कार्रवाई के संकेत मिल रहे थे।
बसों में भरकर ले गई पुलिस-
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस ने किसानों को जबरन बसों में भरकर ले जाया। जसविंदर सिंह लोंगोवाल, जोबनप्रीत सिंह और ठाकुर दलीप सिंह जैसे नेताओं को छेहर्टा, मत्तेवाल और मेहता थानों में भेजा गया। पंधेर ने कथित तौर पर सड़क खाली करने की सहमति दी थी, लेकिन धरना जारी रखने के लिए वैकल्पिक जगह मांगी थी। पुलिस ने यह मांग नहीं मानी और धरना स्थल साफ कर दिया। बाद में खबर आई, कि तीनों थानों से हिरासत में लिए गए किसानों को गोइंदवाल जेल भेज दिया गया।
जवाब में किसानों ने किया रेल और हाईवे जाम-
पुलिस कार्रवाई को “दमनकारी और असंवैधानिक” बताते हुए किसानों ने तुरंत जवाबी कदम उठाए। अमृतसर-जम्मू रेल लाइन पर जैंतीपुर गांव में और अमृतसर-खेमकरण रेल लाइन पर गोहालवड़ गांव में रेल पटरियाँ जाम कर दी गईं। इसके साथ ही तरन तारन ज़िले के सरहाली कलां गांव के पास अमृतसर-बठिंडा राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद कर दिया गया।
मालवा-दोआबा में भी फैला आंदोलन-
विरोध की लहर पंजाब के माझा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। मालवा और दोआबा में भी प्रदर्शन हुए और मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले फूंके गए। किसान नेताओं सतनाम सिंह पन्नू, बलदेव सिंह ज़ीरा और गुरमनीत सिंह मंगत ने कहा, कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी हिरासत में लिए गए नेता और कार्यकर्ता रिहा नहीं हो जाते और किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं।
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क्या हैं किसानों की मांगें?
किसानों की प्रमुख मांगों में MSP की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का अमल, कर्ज़ माफी, बिजली संशोधन विधेयक 2025 की वापसी, भारत-अमेरिका कर-मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करना, बीज संशोधन विधेयक की वापसी और नए श्रम संहिताओं को हटाना शामिल हैं। इसके अलावा शंभू-खनौरी धरना मोर्चे से जुड़े ₹3.77 करोड़ के मुआवज़े, मृत प्रदर्शनकारियों और बाढ़ पीड़ितों के लिए मुआवज़े की माँग भी की गई है। BKU एकता उग्राहन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहन ने भी पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसान नेता केवल लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे थे।
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