Iran New Currency Note
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    Iran New Currency Note: जब किसी देश को अपना सबसे बड़ा नोट जारी करना पड़े, तो यह खुशी की बात नहीं होती, यह उस देश की अर्थव्यवस्था की तकलीफ की कहानी होती है। ईरान ने इस हफ्ते 1 करोड़ रियाल का नया नोट जारी किया, जो अब तक का सबसे बड़ा मूल्यवर्ग है। लेकिन इतने बड़े नंबर के बावजूद इसकी असली कीमत सिर्फ 7 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 580 रुपये है। यही है, ईरान की बेकाबू महंगाई और गिरती मुद्रा की असली तस्वीर।

    गुलाबी नोट पर इतिहास, पर हकीकत कड़वी है-

    नया गुलाबी रंग का नोट देखने में खूबसूरत है, एक तरफ 9वीं सदी की यज़्द की जामे मस्जिद और दूसरी तरफ 2500 साल पुराना बम किला। लेकिन इस खूबसूरती के पीछे एक दर्दनाक सच्चाई है। ईरान के केंद्रीय बैंक ने कहा, कि यह नोट “नकदी तक सार्वजनिक पहुंच सुनिश्चित करने” के लिए जारी किया गया है। फरवरी में 50 लाख रियाल का नोट आया था और अब उसे भी पीछे छोड़ दिया गया।

    ATM खाली, लाइनें लंबी-

    नोट जारी होते ही बैंकों के बाहर लंबी लाइनें लग गईं। लोग डरे हुए थे, कि कहीं ATM खाली न हो जाएं और यह डर सच निकला, कई ATM खाली हो गए। एक ईरानी नागरिक ने Financial Times को बताया, कि वो एक घंटे लाइन में खड़े रहे और बैंककर्मी ने सिर्फ 1 करोड़ रियाल देने की बात कही। जब उन्होंने ज़ोर देकर कहा, कि उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं हैं, तो 3 करोड़ रियाल मिले। यानी सरकारी आश्वासन और ज़मीनी हकीकत में भारी फर्क है।

    बैंक भी हमलों का शिकार-

    ईरान की तकलीफ सिर्फ महंगाई तक नहीं है। इज़राइल और अमेरिका के हमलों में बड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। इस महीने सेना और आम जनता की सेवा करने वाले बैंक सेपाह की एक इमारत पर मिसाइल से हमला हुआ। बैंकों पर हमले से कारोबार धीमा पड़ गया है और आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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    पहले से ही टूटी हुई थी अर्थव्यवस्था-

    सच यह है, कि ईरान की अर्थव्यवस्था युद्ध से पहले भी बहुत नाज़ुक हालत में थी। अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल आमदनी में गिरावट, लंबे समय से चली आ रही महंगाई और भ्रष्टाचार ने रियाल को खोखला कर दिया था। पिछले जून में इज़राइल के साथ 12 दिन के युद्ध के बाद रियाल की कीमत में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई। इस बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने जनवरी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, जिन्हें बेरहमी से कुचला गया और हज़ारों लोग मारे गए। आज ईरान का आम नागरिक एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है, जो सरहद पर भी है और अपनी रसोई में भी।

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    By sumit

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