Trump Epstein Scandal
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    Trump Epstein Scandal: 2024 के चुनाव प्रचार में Donald Trump ने अमेरिकी जनता से एक बड़ा वादा किया था, जीतने पर Jeffrey Epstein से जुड़ी सरकारी फाइलें सार्वजनिक करेंगे। इसी वादे ने उन्हें दोबारा सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन जब वो वापस राष्ट्रपति बने तो यह वादा खोखला साबित होने लगा।

    संसद को बीच में आकर एक कानून लाना पड़ा, जिसके तहत Trump को यह फाइलें जारी करना कानूनी ज़िम्मेदारी बन गई। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को उनके प्रशासन ने इतने उलझे हुए तरीके से अंजाम दिया, कि यह खुद एक बड़े कांड में बदल गया और उनकी कुर्सी तक हिलती नज़र आई।

    क्या ईरान पर हमला एक चाल थी?

    जब Epstein कांड से घिरे Trump ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की तो सवाल उठने लगे। अमेरिकी सांसद Thomas Massie जो खुद इन फाइलों को जारी करवाने की मुहिम में सबसे आगे रहे हैं, उन्होंने 1 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा, कि किसी दूसरे देश पर बमबारी करने से Epstein फाइलें गायब नहीं होंगी। यह बयान तेज़ी से फैला और बहस छिड़ गई, कि क्या Trump ने जानबूझकर देश का ध्यान भटकाने के लिए यह जंग शुरू की।

    सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे-

    17 मार्च को The Telegraph ने एक सर्वे के हवाले से बताया कि 52 फीसदी अमेरिकी मानते हैं, Trump ने Epstein कांड से ध्यान हटाने के लिए कम से कम आंशिक रूप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। यह सर्वे 6 से 8 मार्च के बीच 1,272 मतदाताओं पर किया गया।

    40 फीसदी का मानना था, कि इन फाइलों का इस फैसले से कोई लेना-देना नहीं जबकि 8 फीसदी अनिश्चित थे। सबसे दिलचस्प बात यह रही, कि 81 फीसदी विपक्षी Democrats के साथ-साथ 52 फीसदी निर्दलीय और यहाँ तक कि 26 फीसदी Trump की अपनी पार्टी के लोग भी मानते हैं कि यह जंग ध्यान भटकाने की चाल है।

    दूसरे सर्वे भी दे रहे हैं चेतावनी-

    18 मार्च को Navigator Research ने बताया ,कि 40 फीसदी अमेरिकी सोचते हैं Trump ने Epstein फाइलों से ध्यान हटाने के लिए यह जंग शुरू की। उतने ही यानी 40 फीसदी का मानना है, कि इसके पीछे तेल और संसाधनों की चाह थी। 49 फीसदी अमेरिकियों ने इस जंग का विरोध किया, जबकि 40 फीसदी ने समर्थन दिया।

    YouGov के ताज़ा आंकड़े बताते हैं, कि ईरान मामले में Trump की नीति को सिर्फ 39 फीसदी की मंज़ूरी मिली, जबकि Epstein फाइलों के मामले में यह घटकर महज़ 24 फीसदी रह गई, जो उनके लिए अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन है।

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    जनता का भरोसा टूटता दिख रहा है-

    चाहे जंग की वजह कुछ भी हो, आंकड़े साफ बता रहे हैं, कि अमेरिकी जनता अपने राष्ट्रपति पर भरोसा करने को तैयार नहीं है। 46 फीसदी का कहना है, कि इस जंग ने दुनिया को और असुरक्षित बना दिया है। एक तरफ Epstein कांड और दूसरी तरफ ईरान की जंग Trump के लिए यह दोहरी मुश्किल बनती जा रही है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।