North Korea Election: दुनिया में एक ऐसा देश है, जहां चुनाव होते हैं लेकिन नतीजा पहले से तय होता है। उत्तर कोरिया में 15 मार्च 2026 को 15वीं सर्वोच्च जन सभा के लिए चुनाव हुए और जो नतीजे आए वे दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए। सरकारी मीडिया के मुताबिक, 99.99 फीसदी मतदान हुआ और सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को 99.93 फीसदी मत मिले। लेकिन जिस बात ने सबको हैरान किया वह थी, उस 0.07 फीसदी का जिक्र, जिन्होंने ‘ना’ कहा।
99.93% मतदान कैसे?
उत्तर कोरिया की केंद्रीय चुनाव समिति ने 17 मार्च को आधिकारिक नतीजे जारी किए। इनके मुताबिक, सिर्फ 0.0037 फीसदी लोग मतदान नहीं कर पाए और वे भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि वे विदेश में थे या समुद्र में थे। यानी देश में मौजूद लगभग हर नागरिक ने वोट डाला। उत्तर कोरिया जैसे देश में जहां असहमति की कोई जगह नहीं होती, वहां यह आंकड़े हमेशा की तरह चौंकाने वाले हैं।
वो 0.07% इंटरनेट पर मचा तूफान-
इस चुनाव में एक असामान्य बात यह रही, कि सरकार ने खुद यह माना, कि 0.07 फीसदी लोगों ने उम्मीदवारों को नकार दिया। उत्तर कोरिया जैसे देश में जहां विरोध की आवाज़ दबा दी जाती है वहां यह आंकड़ा सार्वजनिक करना अपने आप में अजीब है। और बस यहीं से सोशल मीडिया पर चुटकियों का सिलसिला शुरू हो गया।
एक वायरल कमेंट में लिखा था, “उन 0.07 फीसदी लोगों के लिए एक पल की चुप्पी। वे जल्द ही एक बहुत लंबी और एकतरफा कैंपिंग ट्रिप पर जाने वाले हैं।” एक और व्यंग्यकार ने लिखा, “ताज़ा खबर: उत्तर कोरिया की आबादी इस गर्मी में ठीक 0.07 फीसदी कम होने की उम्मीद है।” कई लोगों ने उन 0.07 फीसदी को “धरती के सबसे साहसी लोग” करार दिया।
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राजनीतिक मकसद क्या है?
यह चुनाव महज एक औपचारिकता है। फरवरी 2026 में वर्कर्स पार्टी की 9वीं कांग्रेस में किम जोंग उन को महासचिव के रूप में फिर से चुना गया था। अब यह नई संसद 22 मार्च को बैठेगी और संविधान में बदलाव को औपचारिक रूप देगी। इसमें दक्षिण कोरिया को “शत्रु राज्य” घोषित करने जैसे कड़े रुख को कानूनी जामा पहनाया जाएगा और किम को राज्य मामलों के आयोग का अध्यक्ष फिर से बनाया जाएगा।
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