Israel Iran War
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    Israel Iran War: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रेस के सामने आए। जैसे ही वो सामने आए, उन्होंने सबसे पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपनी मौत की खबरों को “झूठी खबर” बताकर खारिज किया और मुस्कुराते हुए कहा, “मैं ज़िंदा हूं और आप सब इसके गवाह हैं।” इस एक वाक्य ने दुनियाभर में चल रही अटकलों पर पूर्णविराम लगा दिया।

    ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाना-

    जब उनसे पूछा गया, कि इज़राइल ईरान के वरिष्ठ नेताओं को क्यों निशाना बना रहा है, तो नेतन्याहू ने साफ कहा कि यह ईरानी शासन को अंदर से तोड़ने की सोची-समझी कोशिश है। उनके मुताबिक, यह काम एक दिन या बीस दिन में नहीं होगा, लेकिन दरारें दिखने लगी हैं और इज़राइल उन्हें और गहरा करने में जुटा है। उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया, कि इज़राइल लंबे समय तक यह दबाव बनाए रखने की मंशा रखता है।

    ट्रम्प से वादा-

    नेतन्याहू ने स्वीकार किया, कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को निजी तौर पर वचन दिया है, कि ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला नहीं किया जाएगा। लेकिन जब पत्रकार ने सीधे पूछा, कि अगर ट्रम्प बढ़ती तेल कीमतों की वजह से युद्ध रोकने को कहें तो क्या वो मानेंगे, तो नेतन्याहू ने सीधा जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। बस इतना कहा, “वो नेता हैं, मैं उनका साथी हूं।” यह जवाब न हां था, न ना और शायद यही इसकी सबसे बड़ी खासियत थी।

    “ट्रम्प को कोई नहीं बता सकता क्या करना है”

    जब यह सुझाव आया कि इज़राइल ने अमेरिका को इस युद्ध में घसीटा है, तो नेतन्याहू ने इसे सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प पहले से ही इस अभियान के साथ पूरी तरह खड़े हैं और जो यह सोचता है कि ट्रम्प को कोई बता सकता है कि क्या करना है, वो खुद को धोखा दे रहा है। अमेरिकी मदद के बिना युद्ध जारी रख सकते हैं या नहीं इस सवाल पर उन्होंने पत्रकार को ही टोकते हुए कहा, “आपके सवाल खत्म हो गए।”

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    नवरोज़ पर तेहरान में धमाके, दुनिया की नींद उड़ी-

    20 मार्च को जब ईरान में नवरोज़ यानी फारसी नव वर्ष का जश्न मनाया जा रहा था, उसी रात इज़राइल ने तेहरान पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तेल ठिकानों पर हमले तेज़ कर दिए और दुबई के ऊपर भी भारी धमाकों की खबरें आईं जहां लोग ईद उल-फितर मना रहे थे। इज़राइल में भी हैफा से लेकर लेबनानी सीमा तक सायरन बजते रहे। यह युद्ध अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रहा, पूरी दुनिया इसके असर को महसूस कर रही है और हर नया दिन एक नया मोड़ लेकर आ रहा है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।