Iran Israel War Pakistan: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खावजा आसिफ ने X पर एक गंभीर पोस्ट करते हुए कहा, कि ईरान पर यह जंग उसकी मर्जी के बिना थोपी गई है। उनके मुताबिक, ईरान बातचीत और समझौते के लिए तैयार था, लेकिन इसके बावजूद उस पर युद्ध लाद दिया गया। उनका यह भी कहना था, कि इस पूरे टकराव के पीछे Zionists का हाथ है।
जिनका मकसद इजरायल का दबदबा बढ़ाना और उसकी सीमाओं को पाकिस्तान की सरहद तक फैलाना है। यह बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है और पूरी दुनिया इस संघर्ष की दिशा को लेकर चिंतित है।
इस्लामी दुनिया के हर बड़े टकराव में Zionism का हाथ रहा-
आसिफ ने आगे कहा, कि 1948 में इजरायल के बनने के बाद से लेकर आज तक, इस्लामी दुनिया में जितने भी बड़े संघर्ष हुए हैं, उनमें Zionism की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। उनका यह भी कहना था, कि दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतें भी Zionism के सामने बेबस हैं और दशकों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा Zionists तय करते आए हैं।
भारत-अफगानिस्तान-ईरान का गठजोड़-
आसिफ की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी, कि अगर इजरायल इस जंग में जीत गया, तो इसके बाद भारत, अफगानिस्तान और ईरान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ एक साझा एजेंडा बना लेंगे। उन्होंने कहा, कि इससे पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएंगी और देश चारों तरफ से दुश्मनों से घिर जाएगा। उन्होंने पाकिस्तान के सभी 25 करोड़ नागरिकों से अपील की, कि वे इस साजिश को समझें, चाहे उनकी राजनीतिक या धार्मिक सोच कोई भी हो।
Vassal State क्या होता है और यह पाकिस्तान के लिए क्यों खतरनाक है?
आसिफ ने चेतावनी दी, कि यह सब पाकिस्तान को एक “Vassal State” बना सकता है। सीधे शब्दों में कहें, तो Vassal State वह देश होता है, जो नाम का तो आज़ाद होता है, लेकिन असल में किसी दूसरी बड़ी ताकत के इशारों पर चलता है। उसकी अपनी विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और फैसले उसके खुद के नहीं होते, बल्कि कोई और ताकतवर देश उसे पर्दे के पीछे से नियंत्रित करता है। आसिफ का डर यही है, कि अगर पाकिस्तान चारों ओर से दुश्मन देशों से घिर गया और आर्थिक व सैन्य दबाव बढ़ा, तो पाकिस्तान की संप्रभुता महज कागजों तक सिमट कर रह जाएगी।
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परमाणु शक्ति पाकिस्तान-
बयान के अंत में आसिफ ने पाकिस्तान की परमाणु शक्ति का जिक्र किया। उनका कहना था, कि यही ताकत है, जो पाकिस्तान को दुश्मनों से बचा रही है और पाकिस्तान की सेना की क्षमता को पूरी दुनिया स्वीकार करती है। गौरतलब है, कि पाकिस्तान और ईरान के बीच 900 किलोमीटर से भी लंबी साझा सरहद है, इसलिए मध्य पूर्व में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है।
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