Career Advice
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    Career Advice: आज के दौर में हर किसी पर यह प्रेशर रहता है, कि वह अपने फील्ड में सबसे बेहतर बने। टॉप कोडर, टॉप मार्केटर, टॉप डिजाइनर या किसी भी क्षेत्र में नंबर वन। लेकिन भारत के मशहूर एंटरप्रेन्योर और एजुकेटर अंकुर वारिकू का कहना है, कि एक ही चीज में परफेक्शन की यह दौड़ पुरानी सोच है, जो आज की दुनिया में काम नहीं आती। उनका वायरल लिंक्डइन पोस्ट इस बात को साफ शब्दों में कहता है, कि आपके करियर को किसी एक बड़े टैलेंट पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। जो प्रोफेशनल्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वे वो हैं, जो अलग अलग स्किल्स का ऐसा मिक्स बना रहे हैं, कि उन्हें रिप्लेस करना नामुमकिन हो जाता है।

    एक टैलेंट पर निर्भरता सबसे बड़ी गलती-

    वारिकू का पोस्ट उस मिथ से शुरू होता है, जो हम में से ज्यादातर लोग बचपन से सुनते आए हैं, कि ग्रोथ के लिए किसी एक स्किल में सबसे बेहतर बनना जरूरी है। यह सोच, कि कोडिंग में बेस्ट बनो या सेल्स में बेस्ट बनो। लेकिन जैसा, कि वारिकू अपने स्लाइड डेक में लिखते हैं, यह आपके करियर को देखने का सबसे लिमिटिंग तरीका है। किसी एक स्किल में वर्ल्ड क्लास बनना आज भी कुछ लोगों के लिए काम करता है, लेकिन ज्यादातर प्रोफेशनल्स बहुत भीड़ भरे मार्केट में कंपीट कर रहे हैं।

    जब आपके आसपास हर कोई कोड कर सकता है, डिजाइन कर सकता है, नंबर्स क्रंच कर सकता है या अकाउंट्स मैनेज कर सकता है, तो सिर्फ अपने कोर स्किल में अच्छा होना काफी नहीं रह जाता। तो फिर किसी को इर्रिप्लेसेबल क्या बनाता है? इसका जवाब है, स्किल्स का इंटरसेक्शन यानी अलग अलग कौशलों का मेल।

    दो रास्ते हैं अलग दिखने के-

    वारिकू कहते हैं, कि सच में अलग दिखने के दो तरीके हैं। पहला, किसी एक स्किल में टॉप 1 से 5 परसेंट में आ जाओ। दूसरा, कुछ ऐसी स्किल्स में टॉप 20 परसेंट में रहो, जो आमतौर पर साथ नहीं मिलतीं। दूसरा तरीका ही वह जगह है, जहां ज्यादातर लोग जीतते हैं। जैसा कि वारिकू कहते हैं, जब स्किल्स एक दूसरे को काटती हैं, तो आपकी यूनीकनेस ही आपका एज बन जाती है।

    इसे ऐसे समझिए। एक डिजाइनर जो एक्सपेरिमेंट्स भी रन कर सकता है। एक फाइनेंस एनालिस्ट जो साफ साफ लिख सकता है। एक टीचर जो स्टोरीटेलिंग समझता है। एक कोडर जो कस्टमर्स से बात कर सकता है। हर एक स्किल अकेले में एवरेज प्लस हो सकती है, लेकिन इनका कॉम्बिनेशन रेयर है और रेयरिटी ही पावर है।

    तीन लेयर का फॉर्मूला-

    वारिकू का फ्रेमवर्क बेहद सिंपल और सरप्राइजिंगली एक्शनेबल है। वे इसे तीन लेयर्स के जरिए समझते हैं। पहली है, एंकर स्किल यानी वह स्किल जिसके लिए आप पहले से जाने जाते हैं, आपका बेस। दूसरी है एडजेसेंट स्किल यानी कुछ ऐसा जो नेचुरली आपकी वैल्यू बढ़ाता है, एक ऐसी स्किल जो एंकर को सपोर्ट करती है। तीसरी है क्रिएटिव एंप्लीफायर यानी एक ऐसी स्किल, जो आपके सोचने के तरीके को बदल देती है, फ्रेश आइडियाज लाती है और आपके काम में स्पार्क डाल देती है। यहीं पर ज्यादातर करियर ट्रांसफॉर्म होते हैं।

    खुद का उदाहरण भी दिया-

    वारिकू अपने आप को भी उदाहरण के तौर पर पेश करते हैं। वे कहते हैं, कि मैं न तो बेस्ट टीचर हूं, न बेस्ट स्पीकर, न सबसे बड़ा सोशल मीडिया क्रिएटर और न ही बेस्ट लीडर। वे बस कई चीजों में अच्छे हैं, जो खूबसूरती से एक साथ काम करती हैं, जैसे टीचिंग, पब्लिक स्पीकिंग, आइडियाज को सिंपलिफाई करना और टीम्स को लीड करना। नतीजा यह है, कि उनका करियर किसी और के जैसा नहीं दिखता। यही तो पॉइंट है। आप इर्रिप्लेसेबल तब बनते हैं, जब आपका स्किल मिक्स कॉपी करना मुश्किल हो।

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    AI के दौर में यह क्यों जरूरी है-

    उनके पोस्ट की सबसे मजबूत लाइनों में से एक है, कौन सी नई स्किल मुझे रिप्लेस होने से बचाती है? यह सवाल AI के दौर में अपस्किलिंग के बारे में सब कुछ बदल देता है। ट्रेंडिंग टूल्स के पीछे भागने की बजाय, फोकस स्ट्रैटेजिक स्टैकिंग पर शिफ्ट हो जाता है। एक इंसान जो क्रिटिकली सोच सकता है, कॉन्टेक्स्ट समझ सकता है, आइडियाज कनेक्ट कर सकता है और ऐसे तरीके से कम्युनिकेट कर सकता है, जो मशीनें नहीं कर सकतीं, वह तुरंत किसी सिंगल टेक्निकल स्किल पर निर्भर व्यक्ति से ज्यादा वैल्युएबल हो जाता है। वारिकू की सलाह लगभग काव्यात्मक है, एंकर डीप, एक्सपैंड वाइड, बी पॉजिटिवली अनप्रिडिक्टेबल। आपको सबको आउटशाइन करने की जरूरत नहीं है, आपकी स्किल्स को बस आउट कंबाइन करना है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।