Tirupati Temple Silk Scam
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    Tirupati Temple Silk Scam: तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम यानी TTD एक बार फिर बड़े विवाद में फंस गया है। लड्डू में घी मिलावट के घोटाले के एक साल बाद अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि मंदिर को पूरे 10 साल तक नकली सिल्क के दुपट्टे सप्लाई किए गए। यह दुपट्टे असली शहतूत सिल्क की जगह पॉलिस्टर के बने थे, जबकि टेंडर में शुद्ध सिल्क की मांग की गई थी। इस घोटाले में मुख्य सप्लायर VRS Export of Nagari ने करोड़ों की कमाई की है। अब एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने जांच शुरू कर दी है और TTD ने दोषियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।

    तिरुपति के सिल्क दुपट्टों का महत्व-

    TTD दानदाताओं और VIP आगंतुकों को रंगनायकुला मंडपम में वेदासिर्वचनम के दौरान सिल्क दुपट्टे भेंट करता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और श्रद्धालुओं के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। इन दुपट्टों को शुद्ध शहतूत सिल्क से 20/22 डेनियर यार्न के साथ बनाया जाना चाहिए।

    इन पर संस्कृत और तेलुगु में “ॐ नमो वेंकटेशाय” लिखा होना चाहिए, साथ ही शंख, चक्र और नमम के प्रतीक भी होने चाहिए। हर दुपट्टे पर सिल्क होलोग्राम भी अनिवार्य है। ट्रस्ट हर साल इन दुपट्टों की खरीद पर कई करोड़ रुपये खर्च करता है क्योंकि लाखों श्रद्धालु इस पवित्र प्रक्रिया से गुजरते हैं।

    कैसे सामने आया यह घोटाला-

    TTD के चेयरमैन बी आर नायडू ने मंदिर की सतर्कता और सुरक्षा विंग को VRS द्वारा सप्लाई किए गए दुपट्टों की गुणवत्ता जांचने को कहा। तिरुपति गोदाम और तिरुमला के वैभवोत्सव मंडपम से ताजा स्टॉक के नमूने लिए गए। इन सभी नमूनों को बेंगलुरु और धर्मावरम की सेंट्रल सिल्क बोर्ड लेबोरेटरी में भेजा गया। दोनों लैब्स का नतीजा एक ही था – दुपट्टे पॉलिस्टर के थे, सिल्क के नहीं। सतर्कता टीम ने यह भी पाया कि किसी भी नमूने पर जरूरी सिल्क होलोग्राम नहीं था।

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    55 करोड़ का घोटाला और श्रद्धालुओं का गुस्सा-

    2015 से 2025 के बीच VRS Export और इसकी सहयोगी कंपनियों ने TTD को 54.95 करोड़ रुपये का माल सप्लाई किया। इसके अलावा विक्रेता ने 1,389 रुपये प्रति दुपट्टे की दर से 15,000 दुपट्टों का एक नया कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल कर लिया था। मंदिर में दिए जाने वाले सिल्क दुपट्टे प्रसिद्ध लड्डू की तरह ही पवित्र माने जाते हैं।

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    कई श्रद्धालुओं के लिए पॉलिस्टर को सिल्क के रूप में बेचना सिर्फ वित्तीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला है। पिछले साल लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी मिलाए जाने के खुलासे के बाद यह घोटाला श्रद्धालुओं के गुस्से को और बढ़ा गया है।

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।