Pete Hegseth
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    Pete Hegseth: ईरान के साथ अमेरिका का युद्ध अब चौथे हफ्ते में पहुंच गया है। लेकिन अब भी साफ नहीं है, कि आखिर यह युद्ध शुरू क्यों और कैसे हुआ। Tennessee में एक राउंडटेबल के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि Defence Secretary Pete Hegseth वो पहले शख्स थे, जिन्होंने मिलिट्री एक्शन की वकालत की।

    Pete ने कहा था-

    ट्रंप ने Tennessee में कहा, “Pete, मुझे लगता है, तुम पहले व्यक्ति थे, जिसने बोला और कहा कि ‘चलो करते हैं, क्योंकि तुम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते।'” यह बयान दिलचस्प है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के भीतर कई अलग-अलग कहानियां चल रही हैं, कि आखिर ईरान पर हमला करने का फैसला किसने लिया।

    युद्ध के कारण भी हर किसी के मुताबिक, अलग-अलग हैं। कुछ अधिकारियों ने दावा किया, कि इजरायल वैसे भी ईरान पर हमला करने वाला था, इसलिए अमेरिका की भागीदारी जरूरी थी। कुछ अन्य ने कहा, कि ईरान परमाणु हथियार तैनात करने वाला था। ट्रंप ने इसे मिडिल ईस्ट की समस्या का जवाब बताया और कहा, “मैंने Pete को बुलाया। मैंने जनरल Kane को बुलाया। मैंने हमारे बहुत से महान लोगों को बुलाया। हमें मिडिल ईस्ट में समस्या है या हम मिडिल ईस्ट में एक छोटी यात्रा करके एक बड़ी समस्या खत्म कर सकते हैं।”

    कौन हैं Pete Hegseth –

    Pete Hegseth अमेरिका के Defence Secretary हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के सबसे करीबी सलाहकारों में से एक। वो ट्रंप प्रशासन में एक प्रमुख फिगर बने हुए हैं और ईरान युद्ध के मैसेजिंग में उनकी अहम भूमिका है। Hegseth ने साफ किया है, कि उनके लक्ष्यों में ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करना, ड्रोन प्रोडक्शन बंद करना और नेवल पावर को नष्ट करना शामिल है। उन्होंने मीडिया कवरेज को भी चैलेंज किया है। जब ऑपरेशन की टाइमलाइन के बारे में पूछा गया, तो Hegseth ने कोई खास डिटेल नहीं दी, लेकिन कहा कि प्रयास “बहुत ज्यादा ट्रैक पर है।”

    युद्ध के गंभीर परिणाम-

    हालांकि ट्रंप का टोन बहुत कैजुअल था, लेकिन युद्ध के परिणाम बेहद गंभीर रहे हैं। अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और यह एक रीजनल क्राइसिस में बदल गया है। ट्रंप ने यह भी कहा, कि खाड़ी में ईरान के रिटैलिएटरी स्ट्राइक अप्रत्याशित थे। उन्होंने कहा, “कोई इसके बारे में सोच भी नहीं रहा था।” लेकिन यह रिपोर्ट्स से मेल नहीं खाता जो बताती हैं, कि संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई की आंतरिक चेतावनियां जारी की गई थीं लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई।

    किसने किया समर्थन, किसने किया विरोध-

    ट्रंप ने स्वीकार किया, कि उपराष्ट्रपति JD Vance युद्ध को लेकर कम उत्साहित थे, हालांकि Vance ने सार्वजनिक रूप से इसकी आलोचना नहीं की है। रिपोर्ट्स बताती हैं, कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मीडिया व्यक्तित्व रूपर्ट मर्डोक ने सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि प्रशासन के भीतर अन्य लोगों ने सावधानी बरतने की सलाह दी। संघर्ष ने आंतरिक तनाव पैदा किया है, जिसके कारण Joe Kent ने इस्तीफा दे दिया। वो National Counterterrorism Centre के पूर्व प्रमुख थे।

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    बातचीत हो रही है या नहीं-

    इस बीच ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित बातचीत का जिक्र किया है, जिससे दुश्मनी खत्म हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल सके। उन्होंने कहा, कि एक ईरानी “टॉप पर्सन,” उनके दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ के बीच बातचीत हो रही है। लेकिन ईरान ने इनकार किया है, कि ऐसी कोई बातचीत हो रही है। ट्रंप ने शुरू में सोमवार की डेडलाइन सेट की थी, कि ईरान अमेरिकी मांगों को पूरा करे या और हमलों का सामना करे, लेकिन इसे पांच दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है।

    बदलते स्पष्टीकरण, इनकार की गई बातचीत और जिम्मेदारी के बारे में बदलते नैरेटिव के साथ, यह अनिश्चितता बनी हुई है, कि युद्ध कैसे शुरू हुआ, इसकी दिशा क्या है और अंततः इसे शुरू करने का फैसला किसने लिया।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।