Ngo Bao Chau: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मैथ पुरस्कार ‘फील्ड्स मेडल’ से सम्मानित मैथमैटिक्स Ngo Bao Chau ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। 15 साल अमेरिका में पढ़ाने और शोध करने के बाद उन्होंने अमेरिका छोड़ने का फैसला किया है और अब हांगकांग को अपना नया घर बना रहे हैं। उनका कहना है, कि यह फैसला सिर्फ एक जगह बदलने का नहीं बल्कि एशिया के भविष्य में भरोसे का है।
अमेरिका क्यों छोड़ा?
54 साल के Ngo Bao Chau 2010 से शिकागो विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे थे। लेकिन अब उन्होंने साफ कह दिया है, कि अमेरिका में “बहुत सी ऐसी चीजें हो रही हैं जो उन्हें पसंद नहीं।” हांगकांग के एक अखबार को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, कि अमेरिकी विश्वविद्यालय 400 सालों से ज्ञान और खोज के महान केंद्र रहे हैं। वहां नस्ल से परे हर व्यक्ति को सम्मान मिलता था। लेकिन अब वीजा नीतियों और विदेशी छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर जो हो रहा है वह दिल तोड़ने वाला है। उन्होंने कहा, “मैं ऐसी जगह रहना चाहता हूं, जहां मुझे वो बातें सुननी और झेलनी न पड़ें जो मुझे पसंद नहीं।”
एशिया को बनाना चाहते हैं गणित-विज्ञान का नया केंद्र-
Ngo का सपना सिर्फ अमेरिका से दूर जाना नहीं है, उनकी नज़र एशिया के उज्जवल भविष्य पर है। उन्होंने कहा, कि वे चाहते हैं, कि एशिया अगला अमेरिका या यूरोप बने, एक ऐसी जगह जहां विज्ञान और गणित फले-फूले। उनके मुताबिक, चीन और पूरे एशिया के पास इस वक्त एक अनूठा मौका है, कि वे दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक केंद्रों में जगह बनाएं और वे इस बदलाव का हिस्सा बनने के लिए बेताब हैं।
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हांगकांग बनेगा एशियाई गणित का जोड़ने वाला धागा-
Ngo ने हांगकांग को लेकर एक खास सोच जाहिर की। उन्होंने कहा कि वे हांगकांग को एशियाई गणित का जोड़ने वाला केंद:बिंदु बनाना चाहते हैं। चीन, भारत, ताइवान, जापान, वियतनाम और सिंगापुर इन सभी देशों के गणित और विज्ञान को एक सूत्र में पिरोने का काम हांगकांग कर सकता है। वियतनामी और फ्रांसीसी दोनों नागरिकता रखने वाले Ngo का यह कदम एशिया के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकता है।
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