Nepal Protest 2026
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    Nepal Protest 2026: नेपाल में नई सरकार बनने के कुछ ही हफ्तों के भीतर हालात तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। Balen Shah के नेतृत्व वाली सरकार को अब सड़कों पर उतरते गुस्साए लोगों का सामना करना पड़ रहा है। जो विरोध पहले छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, वह अब देश की राजधानी काठमांडु से लेकर बड़े शहरों तक फैल चुका है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है, कि प्रदर्शनकारियों ने सरकार के प्रशासनिक केंद्र Singha Durbar तक अपनी आवाज पहुंचा दी है।

    टैक्स नीति बनी विवाद की जड़-

    इस पूरे विवाद की शुरुआत सरकार के एक फैसले से हुई, जिसमें भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई। नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह फैसला बड़ा झटका साबित हुआ है।

    लोगों का कहना है, कि सीमा पार से छोटी-छोटी चीजें खरीदना उनकी जरूरत है, कोई लग्जरी नहीं। ऐसे में यह टैक्स उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहा है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, सरकार ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए यह फैसला लिया है।

    छात्रों की एंट्री से आंदोलन हुआ तेज-

    अब यह विरोध सिर्फ आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहा। देशभर में हजारों छात्र भी इस आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं। स्कूल और कॉलेज के छात्र सड़कों पर उतरकर नारेबाजी कर रहे हैं, हाथों में प्लेकार्ड लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यही वजह है, कि यह आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है, जिसमें हर वर्ग की भागीदारी नजर आ रही है।

    भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई आग-

    मामले को और गंभीर तब बना दिया, जब नेपाल के गृह मंत्री Sudan Gurung पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए। उन पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी इन आरोपों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। कई लोग मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहे हैं।

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    सरकार के सामने बड़ी परीक्षा-

    लगातार बढ़ते प्रदर्शन और अलग-अलग मुद्दों के जुड़ने से Balen Shah सरकार के लिए यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है। एक तरफ आर्थिक फैसलों से नाराज जनता है, तो दूसरी ओर छात्रों का बढ़ता आंदोलन और भ्रष्टाचार के आरोप। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है, कि सरकार इस संकट को कैसे संभालती है। आने वाले दिनों में लिए गए फैसले यह तय करेंगे, कि जनता का भरोसा बना रहेगा या हालात और बिगड़ेंगे।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।